बेंगलुरु। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल परिवार और घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि राजनीति, कारोबार, प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र में भी आगे बढ़कर नेतृत्व करना चाहिए। अपने संबोधन में उन्होंने रामायण के पात्रों का उदाहरण देते हुए महिलाओं के साहस, धैर्य और निर्णय क्षमता को रेखांकित किया।
महिला उद्यमिता से जुड़े एक कार्यक्रम में शिवकुमार ने कहा कि समाज की प्रगति में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, महिलाएं परिवार को संभालने के साथ आर्थिक गतिविधियों और संस्थानों को भी प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने की क्षमता रखती हैं। इसलिए उन्हें निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में अधिक अवसर मिलना चाहिए।
शिवकुमार ने सीता के जीवन और उनके संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में महिलाओं के धैर्य और त्याग की कई मिसालें मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सीता का चरित्र कठिन परिस्थितियों में मजबूती के साथ खड़े रहने की प्रेरणा देता है। इसी तरह उन्होंने महिलाओं से अपने भीतर मौजूद नेतृत्व क्षमता को पहचानने और उसका इस्तेमाल करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि अगर महिलाओं को पूंजी, तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार तक आसान पहुंच मिले तो वे बड़े स्तर पर कारोबार खड़ा कर सकती हैं। सरकार और समाज की जिम्मेदारी है कि महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए जरूरी अवसर और सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया जाए।
उपमुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण से जुड़ी सरकारी योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए परिवहन सुविधा, वित्तीय सहायता और कर्ज जैसी योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनका कहना था कि आर्थिक आत्मनिर्भरता महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करती है।
शिवकुमार ने राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर से लेकर संसद तक महिलाओं की संख्या और प्रभाव बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, महिलाओं को केवल प्रतिनिधित्व मिलने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें नीतियां बनाने और महत्वपूर्ण फैसले लेने में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने भारतीय इतिहास और महाकाव्यों में महिलाओं के उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा कि नेतृत्व और दृढ़ता किसी एक वर्ग या लिंग तक सीमित नहीं है। महिलाओं ने अलग-अलग दौर में परिवार, समाज और संस्थाओं को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
शिवकुमार ने महिला उद्यमियों से अपील की कि वे चुनौतियों से घबराए बिना अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से न केवल उनकी व्यक्तिगत स्थिति मजबूत होगी, बल्कि कर्नाटक और देश के विकास को भी नई गति मिलेगी।
उनका संदेश साफ था कि महिलाओं को अवसर मिलने का इंतजार करने के बजाय खुद नेतृत्व की भूमिका के लिए आगे आना चाहिए और समाज के हर क्षेत्र में अपनी निर्णायक मौजूदगी दर्ज करानी चाहिए।



