Monday, August 31, 2026
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शतक से सिर्फ 8 रन दूर रह गए वैभव सूर्यवंशी, 92 पर आउट होकर पटका बैट

दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 92 रन की पारी खेली। वह अपने पहले फर्स्ट क्लास शतक से सिर्फ 8 रन दूर रह गए। 42 गेंदों में फिफ्टी लगाकर वैभव ने दलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र में अर्धशतक का रिकॉर्ड बनाया। 92 रन पर आउट होने के बाद उनकी निराशा साफ नजर आई और उन्होंने बैट पटक दिया।

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर अपनी बल्लेबाजी का दम दिखाया है। महज 15 साल की उम्र में दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए वैभव ने 92 रन की शानदार पारी खेली। हालांकि वह अपने पहले फर्स्ट क्लास शतक से महज 8 रन दूर रह गए। वैभव के आउट होने के बाद उनकी निराशा साफ नजर आई। पवेलियन लौटते समय उन्होंने गुस्से में अपना बैट पटक दिया। स्टैंड्स में मुकाबला देख रहे पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज और चयनकर्ता आरपी सिंह भी वैभव के विकेट पर हैरान नजर आए।

42 गेंदों में फिफ्टी, बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

ईस्ट जोन की ओर से पारी की शुरुआत करने उतरे वैभव सूर्यवंशी ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज दिखाया। उन्होंने महज 42 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। इसके साथ ही वैभव दलीप ट्रॉफी के इतिहास में सबसे कम उम्र में फिफ्टी लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। 27 मार्च 2011 को जन्मे वैभव ने 15 साल और 157 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने करीब छह दशक पुराना रिकॉर्ड तोड़ा। इससे पहले 1968-69 में सेंट्रल जोन के लक्ष्मण सिंह ने 16 साल और 23 दिन की उम्र में नॉर्थ जोन के खिलाफ 63 रन बनाकर यह रिकॉर्ड बनाया था।

पहले ओवर से ही गेंदबाजों पर बरसे वैभव

सेंट्रल जोन को 266 रन पर समेटने के बाद ईस्ट जोन की पारी शुरू हुई। वैभव ने पहले ही ओवर से गेंदबाजों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। शुरुआती ओवर में उन्होंने दो चौके लगाए और सिर्फ 14 गेंदों में 21 रन तक पहुंच गए। इसके बाद 21 गेंदों में उनके खाते में 31 रन हो चुके थे। 12 ओवर के बाद वैभव 28 गेंदों में 40 रन बना चुके थे। इसी दौरान उन्हें एक जीवनदान भी मिला। उनका टॉप एज हवा में गया, लेकिन कैच पूरा नहीं हो सका। वैभव तो पवेलियन की तरफ बढ़ भी गए थे, लेकिन कैच छूटने का पता चलने के बाद वापस क्रीज पर लौट आए। इसके बाद उन्होंने इस मौके का पूरा फायदा उठाया और 42 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर लिया।

सिर्फ चौके-छक्के नहीं, रेड-बॉल क्रिकेट की समझ भी दिखाई

वैभव की इस पारी की खास बात सिर्फ उनकी आक्रामक बल्लेबाजी नहीं रही। उन्होंने कई मौकों पर गेंद को सम्मान दिया, डिफेंस किया, ग्राउंड शॉट खेले और स्ट्राइक भी रोटेट की। टी20 क्रिकेट में विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले वैभव इस पारी में रेड-बॉल क्रिकेट की जरूरतों को भी समझते हुए नजर आए। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में इससे पहले उनका रिकॉर्ड बहुत प्रभावशाली नहीं रहा था। सेमीफाइनल से पहले उन्होंने 13 पारियों में 215 रन बनाए थे और उनका औसत 16.53 था। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 93 रन है, जो उन्होंने बिहार की ओर से मेघालय के खिलाफ बनाया था।

शतक से 8 रन पहले खत्म हुई पारी

अर्धशतक पूरा करने के बाद वैभव ने अपनी रफ्तार जारी रखी और तेजी से शतक की तरफ बढ़ रहे थे। लेकिन 92 रन के स्कोर पर उनका सपना टूट गया। हर्ष दुबे की गेंद पर वैभव ने लेग साइड के ऊपर से बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन गेंद डीप मिडविकेट पर चली गई और वहां उनका कैच लपक लिया गया। आउट होने के बाद वैभव की निराशा कैमरे में कैद हो गई। पवेलियन लौटते समय उन्होंने गुस्से में बैट पटक दिया। उनकी 92 रन की पारी दलीप ट्रॉफी में उनका सबसे बड़ा स्कोर बन गई। साथ ही वह अपने फर्स्ट क्लास करियर के सर्वश्रेष्ठ 93 रन के स्कोर से सिर्फ एक रन दूर रह गए।

आरपी सिंह भी रह गए हैरान

वैभव की इस पारी पर चयनकर्ताओं की भी नजर थी। मुकाबला देखने के लिए स्टैंड्स में पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज और चयनकर्ता आरपी सिंह मौजूद थे। जैसे ही वैभव 92 रन पर आउट हुए, आरपी सिंह भी उनके विकेट पर हैरान नजर आए। उनके अलावा अजय रात्रा और एसएस दास भी मुकाबला देख रहे थे।बीसीसीआई की नई यात्रा नीति के तहत दलीप ट्रॉफी के नॉकआउट चरण के प्रत्येक मुकाबले में दो चयनकर्ताओं की मौजूदगी का प्रावधान है। ऐसे में वैभव की यह पारी चयनकर्ताओं के सामने ही खेली गई।

क्या टेस्ट क्रिकेट की ओर बढ़ रहा है इशारा?

वैभव सूर्यवंशी की पहचान अब तक मुख्य रूप से सफेद गेंद के क्रिकेट में विस्फोटक बल्लेबाजी और कम उम्र में रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ी के तौर पर रही है। लेकिन दलीप ट्रॉफी की 92 रन की पारी ने उनके खेल का एक अलग पहलू सामने रखा है। सबसे कम उम्र में दलीप ट्रॉफी फिफ्टी का रिकॉर्ड बनाने के साथ उन्होंने अपनी पारी में धैर्य, डिफेंस और स्ट्राइक रोटेशन का भी प्रदर्शन किया। शतक भले ही 8 रन दूर रह गया, लेकिन वैभव की यह पारी संकेत देती है कि यह युवा बल्लेबाज रेड-बॉल क्रिकेट की चुनौती को भी तेजी से समझ रहा है।

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