Friday, May 22, 2026
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दिल्ली दंगा केस में उमर खालिद को बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने तीन दिन के लिए जेल से बाहर आने की दी अनुमति

उमर खालिद को दिल्ली हाई कोर्ट ने फरवरी 2020 दिल्ली दंगा मामले में तीन दिन की अंतरिम जमानत दी है। यूएपीए के तहत जेल में बंद खालिद को एक जून से तीन जून तक अपनी मां से मिलने की अनुमति मिली, जिनकी सर्जरी होनी है। अदालत ने मानवीय आधार पर राहत दी। खालिद पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश में शामिल होने का आरोप है, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई थी।

Umar Khalid Bail : नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में यूएपीए के तहत जेल में बंद छात्र नेता उमर खालिद (Umar Khalid) को बड़ी राहत देते हुए तीन दिन की अंतरिम जमानत दे दी है। अदालत ने मानवीय आधार पर यह फैसला सुनाया, ताकि उमर खालिद अपनी मां से मिल सकें, जिनकी जल्द सर्जरी होने वाली है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने खालिद को एक जून से तीन जून तक रिहा करने की अनुमति दी। अदालत ने कहा कि सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें सीमित अवधि के लिए अंतरिम जमानत दी जा रही है। उमर खालिद पर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की “बड़ी साजिश” में शामिल होने का आरोप है। इस मामले में उन पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया था और वह लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं।

पीठ ने गौर किया कि उच्चतम न्यायालय ने पांच जनवरी को खालिद की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा, सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाते हुए यह अदालत अपीलकर्ता को एक जून से तीन जून तक तीन दिन के लिए अंतरिम जमानत देने की इच्छुक है ताकि वह अपनी मां के साथ समय बिता सके। दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस वी राजू ने दलील दी थी कि खालिद की मां की एक छोटी सी सर्जरी होनी है और उसे पुलिस की सुरक्षा में उनसे मिलने की अनुमति दी जानी चाहिए।

अदालत खालिद की अंतरिम जमानत याचिका खारिज करने वाले अधीनस्थ अदालत के 19 मई के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी। उसने अधीनस्थ अदालत से अपने चाचा की मृत्यु के बाद 40 दिन की अंतिक क्रियाओं में शामिल होने और अपनी मां की देखभाल करने के लिए 15 दिन की अंतरिम जमानत देने का अनुरोध किया था। खालिद की मां की सर्जरी होनी है। हालांकि, अधीनस्थ अदालत ने कहा कि उसके दिवंगत चाचा के अंतिम संस्कार में शामिल होना ‘‘इतना आवश्यक नहीं’’ है और परिवार के अन्य सदस्य उसकी मां की देखभाल के लिए उपलब्ध हैं। फरवरी 2020 के दंगों के ‘‘मुख्य साजिशकर्ताओं’’ में से एक खालिद पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस दंगे में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), 2019 और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़की थी। छात्र नेता शरजील इमाम, खालिद सैफी और आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत अन्य लोगों पर भी इस बड़े षड्यंत्र में शामिल होने के आरोप में मामला दर्ज किया गया, जिसकी जांच दिल्ली पुलिस का विशेष प्रकोष्ठ कर रहा है। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति शालिंदर कौर की पीठ ने दो सितंबर, 2025 को इमाम, खालिद, मीरान हैदर और मामले के अन्य आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उच्चतम न्यायालय ने जनवरी में इस आदेश को बरकरार रखा।

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Mukesh Kumar
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