Saturday, October 24, 2026
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‘उड़ता तीर’ मूवी रिव्यू: आतंकवाद और जासूसी पर कॉमेडी का तड़का, आयुष्मान खुराना की एक्टिंग ने जीता दिल

आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘उड़ता तीर’ 23 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। आतंकवाद, जासूसी और भारत-पाकिस्तान के तनाव पर आधारित यह फिल्म गंभीर मुद्दों को कॉमेडी के अंदाज में पेश करती है। फिल्म में आयुष्मान एक पाकिस्तानी जासूस बिलाल का किरदार निभा रहे हैं, जो याददाश्त खोने के बाद खुद को भारतीय अधिकारी समझने लगता है। सारा अली खान, सुहैल नैय्यर और राहुल बोस भी अहम भूमिकाओं में हैं। जानिए फिल्म की कहानी, एक्टिंग, डायरेक्शन, म्यूजिक और क्या आपको यह फिल्म देखनी चाहिए। फिल्म को 3.5/5 रेटिंग दी गई है।

मुंबई |बॉलीवुड अभिनेता आयुष्मान खुराना की फिल्म ‘उड़ता तीर’ सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। आतंकवाद, जासूसी और भारत-पाकिस्तान के तनाव जैसे गंभीर विषयों को इस फिल्म में कॉमेडी के अंदाज में पेश किया गया है। फिल्म की कहानी एक ऐसे पाकिस्तानी जासूस के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी याददाश्त खोने के बाद खुद को भारतीय अधिकारी समझने लगता है और अपने ही मिशन को नाकाम करने में जुट जाता है।

फिल्म में आयुष्मान खुराना के साथ सारा अली खान, सुहैल नैय्यर, राहुल बोस, राम कपूर और गुलशन ग्रोवर अहम भूमिकाओं में हैं। निर्देशक आकाश कौशिक ने गंभीर विषय को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करने की कोशिश की है।

क्या है फिल्म की कहानी?

फिल्म में बिलाल अहमद (आयुष्मान खुराना) और उसका दोस्त अशफाक (सुहैल नैय्यर) पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के ऑपरेटिव हैं। दोनों भारत के खिलाफ एक मिशन पर आते हैं और भारतीय काउंटर टेररिज्म स्क्वॉड यानी CTS में घुसपैठ कर लेते हैं।बिलाल भारतीय अधिकारी विक्रांत की पहचान अपनाता है, जबकि अशफाक ध्रुव बनकर यूनिट में शामिल हो जाता है। अपने मिशन को आगे बढ़ाने के लिए बिलाल डिफेंस मिनिस्ट्री में काम करने वाली यामिनी (सारा अली खान) के करीब आता है।

लेकिन कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है, जब एक हादसे के बाद बिलाल कोमा में चला जाता है और उसकी याददाश्त चली जाती है। अब वह खुद को भारतीय अधिकारी विक्रांत समझने लगता है। उसके भीतर देशभक्ति का ऐसा जुनून पैदा होता है कि वह भारत में सक्रिय पाकिस्तानी आतंकियों को पकड़वाने लगता है।दूसरी ओर, अशफाक की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। उसे अपने दोस्त की असली पहचान भी पता है और मिशन की जिम्मेदारी भी। अब वह अपने ही साथी को रोकने और पाकिस्तानी आकाओं को जवाब देने के बीच फंस जाता है। यहीं से फिल्म में कई मजेदार परिस्थितियां पैदा होती हैं।

एक्टिंग: आयुष्मान की कॉमिक टाइमिंग शानदार

आयुष्मान खुराना फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। अपनी असली पहचान भूलकर खुद को भारतीय अधिकारी समझने वाले किरदार में वह कॉमेडी और गंभीरता के बीच अच्छा संतुलन बनाते हैं। उनके चेहरे के भाव, बॉडी लैंग्वेज और डायलॉग डिलीवरी कई दृश्यों को मजेदार बनाते हैं।सुहैल नैय्यर ने अशफाक के किरदार में उनका अच्छा साथ दिया है। अपने ही दोस्त की हरकतों से परेशान जासूस के रूप में उनकी बेबसी फिल्म में हास्य पैदा करती है।राहुल बोस CTS प्रमुख बर्मन के किरदार में प्रभावित करते हैं। उनके एक्सप्रेशंस और परिस्थितियों पर प्रतिक्रियाएं कई बार बिना ज्यादा संवाद के ही हंसी पैदा करती हैं।

सारा अली खान यामिनी के किरदार में नजर आती हैं। हालांकि, उनके किरदार को कहानी में और मजबूत जगह मिल सकती थी। राम कपूर, गुलशन ग्रोवर और दिवंगत मुकुल देव भी अपने-अपने किरदारों में नजर आते हैं।

डायरेक्शन: गंभीर मुद्दे पर हल्की-फुल्की कॉमेडी

आकाश कौशिक ने फिल्म का लेखन और निर्देशन किया है। फिल्म का सबसे दिलचस्प पहलू इसका कॉन्सेप्ट है—भारत को नुकसान पहुंचाने आया जासूस अपनी याददाश्त खोने के बाद भारत की सुरक्षा में जुट जाता है।जहां ‘धुरंधर’ जैसी फिल्में जासूसी और आतंकवाद को गंभीर और तनावपूर्ण अंदाज में दिखाती हैं, वहीं ‘उड़ता तीर’ इसी दुनिया को कॉमेडी के जरिए पेश करती है।

फिल्म का पहला हाफ ज्यादा प्रभावी है। बिलाल की गलतफहमियां और अशफाक की परेशानी से कई मनोरंजक दृश्य बनते हैं। हालांकि, दूसरे हाफ में कहानी की रफ्तार कुछ धीमी पड़ती है और कुछ ट्विस्ट पहले ही समझ आने लगते हैं।

म्यूजिक कैसा है?

फिल्म का संगीत सचिन-जिगर ने तैयार किया है। अरिजीत सिंह की आवाज में ‘चन्न’ रोमांटिक और सुकून देने वाला गाना है। ‘जय हिंद’ और ‘चूज़े’ भी फिल्म के माहौल के साथ तालमेल बैठाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, कुछ जगह संगीत कहानी की रफ्तार को थोड़ा प्रभावित करता है।

‘उड़ता तीर’ देखें या नहीं?

‘उड़ता तीर’ की सबसे बड़ी ताकत इसका अनोखा कॉन्सेप्ट और आयुष्मान खुराना की कॉमिक टाइमिंग है। सुहैल नैय्यर और राहुल बोस भी कई दृश्यों में अच्छा प्रभाव छोड़ते हैं। फिल्म का पहला हाफ ज्यादा मनोरंजक है, जबकि दूसरे हाफ में कहानी थोड़ी कमजोर पड़ती है।अगर आपको हल्की-फुल्की कॉमेडी, जासूसी की कहानियां और गलतफहमियों पर आधारित फिल्में पसंद हैं, तो यह फिल्म आपके लिए मनोरंजन का विकल्प हो सकती है। हालांकि, इसे देखने से पहले कहानी में ज्यादा लॉजिक या गंभीर स्पाई थ्रिलर की उम्मीद न रखें।

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