उदयपुर। उदयपुर के करीब 2 करोड़ रुपये के रिश्वत कांड में गिरफ्तार स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के ASP मुकेश सोनी को लेकर जांच जारी है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के मुताबिक, मामले में दलाल सज्जन सिंह जैन को भी गिरफ्तार किया गया है। ACB सूत्रों के अनुसार, मुकेश सोनी को कथित तौर पर ACB कार्रवाई का पहले से शक था और वह परिवादी पर नजर रख रहा था। जांच एजेंसी अब इस मामले में रिश्वत के आरोपों के साथ-साथ पूरे घटनाक्रम से जुड़े डिजिटल और अन्य सबूतों की जांच कर रही है।
iPhone का पासवर्ड नहीं बता रहा आरोपी
जांच से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद से मुकेश सोनी से पूछताछ की जा रही है। जांच अधिकारियों का दावा है कि उसके iPhone में मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत हो सकते हैं। ACB सूत्रों के अनुसार, जांच अधिकारी पिछले कई दिनों से iPhone को अनलॉक करने के लिए पासवर्ड पूछ रहे हैं, लेकिन आरोपी ने कथित तौर पर पासवर्ड बताने से इनकार किया है।
रिश्वत मांगने से इनकार का दावा
जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान मुकेश सोनी ने रिश्वत मांगने से इनकार किया था। इसके बाद ACB ने कथित तौर पर उसे रिकॉर्डिंग सुनाई, जिसके बाद वह चुप हो गया। वहीं, दलाल सज्जन सिंह जैन ने पूछताछ में कथित तौर पर बताया कि उसने ASP के कहने पर ही परिवादी से संपर्क किया था।
कई सवालों के जवाब की तलाश
जांच एजेंसी के अनुसार, पूछताछ के दौरान परिवादी के घर से DVR जब्त करने, तीन खाली चेक पर हस्ताक्षर करवाने और रिश्वत की रकम के बंटवारे से जुड़े सवाल भी पूछे गए हैं। ACB सूत्रों के मुताबिक, इन सवालों पर आरोपी की ओर से अभी स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।
3 अक्टूबर तक बढ़ी रिमांड
बुधवार को दोनों आरोपियों को ACB कोर्ट में पेश किया गया। ACB की ओर से अदालत में कहा गया कि मामले में जांच अभी बाकी है और आरोपियों से कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की जानी हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मुकेश सोनी और सज्जन सिंह जैन की रिमांड 3 अक्टूबर तक बढ़ा दी।
ACB के जाल तक कैसे पहुंचा मामला?
ACB सूत्रों के अनुसार, मुकेश सोनी को जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली की जानकारी थी और उसे कार्रवाई का शक था। इसी वजह से ACB ने शिकायत के सत्यापन के दौरान अपनी रणनीति में बदलाव किया। परिवादी निरंजन मोगरा ने कथित तौर पर ACB को बताया था कि मुकेश सोनी उसकी निगरानी कर रहा है। इसके बाद परिवादी को ACB कार्यालय आने से रोक दिया गया और अधिकारियों ने खुद उससे संपर्क करने की रणनीति अपनाई।
प्रशासनिक अधिकारी को सत्यापन में किया शामिल
जांच एजेंसी के अनुसार, शिकायत के सत्यापन के लिए एक प्रशासनिक अधिकारी को प्रक्रिया में शामिल किया गया। शुरुआती कार्रवाई में ACB चौकी के किसी कर्मचारी को शामिल नहीं किया गया। ACB के मुताबिक, शिकायत से जुड़ी जानकारी और आरोपों का सत्यापन पूरा होने के बाद कार्रवाई की गई।
क्या है उदयपुर का प्लॉट घोटाला?
मामला उदयपुर के कथित 272 प्लॉट घोटाले से भी जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, साल 2012 में UIT की कई कॉलोनियां नगर निगम को ट्रांसफर की गई थीं। इनमें कई प्लॉट खाली थे। आरोप है कि भू-माफिया और निगम के अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत से खाली जमीनों के फर्जी दस्तावेज और लीज डीड तैयार की गईं। इसके बाद कथित तौर पर फर्जी लोगों के नाम नामांतरण खोलकर इन प्लॉट्स को आगे बेचा गया। इस मामले में साल 2022 में नगर निगम की ओर से सूरजपोल थाने में FIR दर्ज कराई गई थी।
2022 में दर्ज हुई थी FIR
SOG ने 4 अगस्त को सुखेर निवासी पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया और उनके पति निरंजन मोगरा को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान उनके घर से 2 किलो सोने के आभूषण और 11 लाख रुपये बरामद किए जाने की बात सामने आई थी। इसी मामले में FIR पर कार्रवाई नहीं करने और जब्त सामान छोड़ने के बदले कथित तौर पर रिश्वत लेने का आरोप जांच का हिस्सा है। फिलहाल ACB की जांच जारी है और एजेंसी मामले से जुड़े डिजिटल सबूतों, कथित रिश्वत लेन-देन और अन्य कड़ियों की जांच कर रही है।



