मुंबई। भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बुधवार की शुरुआत बेहद खराब रही। अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। कारोबार शुरू होते ही बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों लाल निशान में फिसल गए। सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 76,944 के मुकाबले गिरावट के साथ 76,471 पर खुला। इसके बाद बिकवाली और तेज हो गई और इंडेक्स फिसलकर करीब 76,135 के स्तर तक पहुंच गया। यानी शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में 700 अंक से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। वहीं, 50 शेयरों वाला निफ्टी भी दबाव में रहा। निफ्टी अपने पिछले बंद 24,055 के मुकाबले 23,858 पर खुला और जल्द ही 23,786 के स्तर तक फिसल गया।
इन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
बाजार में आई इस तेज गिरावट के बीच कई बड़े शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। लार्जकैप शेयरों में IndiGo करीब 2.70 फीसदी और Eternal करीब 1.90 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। मिडकैप सेगमेंट में GVT&D करीब 3.10 फीसदी, Godrej Properties 3 फीसदी, MFSL 2.90 फीसदी, TI India 2.50 फीसदी और Voltas 2.20 फीसदी तक फिसल गए। स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का दबाव रहा। KFIN Tech करीब 3.45 फीसदी, Brigade करीब 3 फीसदी और Chola Holdings करीब 2.50 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।
Trump के बयान से बढ़ी बाजार की चिंता
शेयर बाजार में इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस जलमार्ग पर अमेरिका का लगभग पूरा नियंत्रण है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरानी अर्थव्यवस्था संकट की ओर बढ़ रही है। इसके साथ ही उन्होंने उन रिपोर्ट्स को खारिज किया, जिनमें अमेरिका द्वारा ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करने की कोशिश किए जाने की बात कही गई थी।
Crude Oil में तेज उछाल
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ी चिंता का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड करीब 96 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 92 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। वहीं, मर्बन क्रूड की कीमत में 7 फीसदी से ज्यादा का उछाल आया और यह 104 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई। कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी ने एशियाई बाजारों का सेंटीमेंट भी बिगाड़ दिया। जापान का Nikkei करीब 1,800 अंक से ज्यादा फिसला, जबकि हांगकांग का Hang Seng Index करीब 300 अंक नीचे कारोबार करता नजर आया। दक्षिण कोरिया का KOSPI Index करीब 4 फीसदी की गिरावट में रहा। तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए भी चिंता बढ़ा सकती है। महंगा कच्चा तेल महंगाई, चालू खाते और कंपनियों की लागत पर दबाव डाल सकता है, जिसका असर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ता है।
नोट: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या मार्केट एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।



