नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फेडरल रिजर्व के बीच ब्याज दरों को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ट्रंप ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक पर दबाव बनाते हुए ब्याज दरों में कटौती की मांग की है और कहा है कि यदि दरें कम नहीं की गईं तो अमेरिका उन देशों के साथ व्यापार रोक सकता है, जिनके साथ उसका व्यापार घाटा है। ट्रंप ने शुक्रवार, 4 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट में ब्याज दर कम करने की मांग करते हुए व्यापार घाटे वाले देशों के साथ कारोबार बंद करने की चेतावनी दी।
ट्रंप क्यों चाहते हैं ब्याज दरों में कटौती?
ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही हैं। उनके मुताबिक उधार लेने की लागत कम होने से निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा अमेरिकी अर्थव्यवस्था और मजबूत हो सकती है। ट्रंप यह भी मानते हैं कि मजबूत आर्थिक विकास का मतलब जरूरी नहीं कि महंगाई में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी हो। उनका कहना है कि अमेरिका जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत कम ब्याज दरों के साथ भी मजबूती से आगे बढ़ सकती है।
फेड के सामने बढ़ी दुविधा
ट्रंप की ताजा टिप्पणी ऐसे समय आई है जब फेडरल रिजर्व के सामने ब्याज दरों को लेकर अहम फैसला लेना है। फेडरल रिजर्व की अगली बैठक 15 और 16 सितंबर को प्रस्तावित है। एक तरफ ट्रंप लगातार ब्याज दरें कम करने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी आर्थिक आंकड़े फेड के लिए अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। ऐसे में केंद्रीय बैंक के सामने महंगाई और रोजगार के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।
अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट ने बढ़ाई उलझन
ट्रंप की टिप्पणी से कुछ घंटे पहले अमेरिका का रोजगार डेटा जारी हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में करीब 1.62 लाख नौकरियां जुड़ीं। यह अर्थशास्त्रियों के करीब 53,000-55,000 नौकरियों के अनुमान से काफी ज्यादा है। अमेरिका की बेरोजगारी दर 4.1 प्रतिशत पर बनी रही। मजबूत रोजगार आंकड़ों के बाद बाजार में सितंबर की फेड बैठक में तत्काल ब्याज दर कटौती को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई। मजबूत रोजगार बाजार फेड के लिए ब्याज दरों में जल्द कटौती की जरूरत को कम कर सकता है, क्योंकि केंद्रीय बैंक को महंगाई पर भी नजर रखनी होती है।
व्यापार घाटे वाले देशों पर ट्रंप की नजर
अमेरिका का कई बड़े व्यापारिक साझेदारों के साथ व्यापार घाटा है। चीन इस सूची में सबसे ऊपर है। इसके बाद मेक्सिको और वियतनाम जैसे देश प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल अमेरिका का चीन के साथ व्यापार घाटा 200 अरब डॉलर से अधिक रहा। वहीं सभी व्यापारिक साझेदारों को मिलाकर अमेरिका का कुल व्यापार घाटा करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर बताया गया है। यही वजह है कि ट्रंप की व्यापार रोकने वाली चेतावनी को आर्थिक विशेषज्ञ व्यापक प्रभाव वाली नीति के रूप में देख सकते हैं।
अगर व्यापार रोका तो क्या होगा?
यदि अमेरिका वास्तव में बड़े व्यापार घाटे वाले देशों से आयात या कारोबार रोकता है, तो इसका असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं रह सकता। अमेरिकी कंपनियां चीन, मेक्सिको और वियतनाम जैसे देशों से बड़ी मात्रा में सामान और औद्योगिक उत्पाद मंगाती हैं। अचानक व्यापार बाधित होने पर सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है, वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में ट्रंप की कम ब्याज दर की मांग और व्यापार प्रतिबंधों की नीति के बीच विरोधाभास भी पैदा हो सकता है। कम ब्याज दर से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन व्यापार बाधित होने से लागत और महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है।
अब फेड के फैसले पर नजर
डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों के बाद सितंबर में होने वाली फेडरल रिजर्व बैठक और महत्वपूर्ण हो गई है। केंद्रीय बैंक को रोजगार, महंगाई, आर्थिक विकास और वित्तीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ब्याज दर पर फैसला करना होगा। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या फेड ट्रंप के दबाव के बावजूद आर्थिक आंकड़ों के आधार पर फैसला करेगा या ब्याज दरों में कटौती की दिशा में आगे बढ़ेगा? सितंबर की बैठक में इसका जवाब मिल सकता है।



