वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने से जुड़े कानून को फिलहाल लागू नहीं करने का फैसला किया है। शुक्रवार को इस संबंध में आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए ट्रम्प ने कहा कि यह कदम अमेरिका के हित में है। प्रस्तावित कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था। इससे भारत, चीन, हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबैजान जैसे देशों पर असर पड़ सकता था।
इस कानून का उद्देश्य रूस की ऊर्जा से होने वाली कमाई पर रोक लगाना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए मॉस्को को आर्थिक संसाधन जुटाने में कठिनाई हो। ट्रम्प ने 18 सितंबर 2026 को लिंडसे ग्राहम एक्ट पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद उन्हें 30 दिनों के भीतर प्रतिबंधों को लेकर फैसला करना था, लेकिन उन्होंने समयसीमा से पहले ही सख्त कदम उठाने से परहेज किया।
भारत के लिए क्यों अहम है फैसला?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। अगस्त 2026 में देश के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत रही। इस दौरान भारत ने रूस से प्रतिदिन औसतन 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा। ऐसे में रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का प्रस्ताव भारत की ऊर्जा लागत और तेल आपूर्ति के लिए चिंता का विषय था।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत वैश्विक परिस्थितियों और तेल की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए निर्णय लेता है।
तेल की कीमतें और मिडटर्म चुनाव भी अहम
अमेरिका में तेल की बढ़ती कीमतें भी ट्रम्प के फैसले की एक अहम वजह मानी जा रही हैं। यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से आपूर्ति प्रभावित होने और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बना हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका भी तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ाती है।
नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं। ऐसे में पेट्रोल की कीमतें और महंगाई ट्रम्प प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। तेल महंगा होने से अमेरिकी उपभोक्ताओं पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
रूस से डीजल खरीद पर भी विवाद
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रम्प ने रूस से डीजल खरीदने से जुड़े समझौते का भी ऐलान किया था। रूसी डीजल की बिक्री पर लगी पाबंदियों में अप्रैल 2027 तक छूट दिए जाने को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और कुछ यूरोपीय अधिकारियों ने नाराजगी जताई।
अमेरिकी संसद के कुछ सांसदों ने भी इस फैसले का विरोध किया है। रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों के सदस्यों का समर्थन मिला था। ऐसे में ट्रम्प के फैसले ने अमेरिकी राजनीति में भी बहस छेड़ दी है।



