नई दिल्ली। दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण ने गंभीर रूप ले लिया है। राजधानी की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है और कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुंच गया है। हालात इतने चिंताजनक हैं कि सांस के मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए स्वास्थ्य संबंधी खतरा बढ़ गया है। प्रदूषण के बढ़ते स्तर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जाहिर की है। अदालत में एमिकस क्यूरी ने दिल्ली की हवा की तुलना रोजाना 30 सिगरेट पीने जैसी स्थिति से की। हालांकि, यह एक तुलना है, आधिकारिक स्वास्थ्य माप नहीं।
दिल्ली के कई इलाकों में AQI 400 के पार
- IIT क्षेत्र: AQI 442
- पंजाबी बाग: AQI 433
- विवेक विहार: AQI 427
- जहांगीरपुरी: AQI 421
- रोहिणी: AQI 418
- आरके पुरम: AQI 414
- बवाना: AQI 411
- नरेला: AQI 408
वहीं NCR के गुरुग्राम में AQI 355 और फरीदाबाद में 347 दर्ज किया गया।
प्रदूषण के पीछे क्या हैं बड़ी वजहें?
दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण के पीछे वाहनों से निकलने वाला धुआं, पराली जलाना और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियां प्रमुख कारणों में शामिल हैं। त्योहारों के दौरान पटाखों से भी वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों को लेकर जताई सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए सांस्कृतिक बदलाव की जरूरत पर जोर दिया है। ग्रीन पटाखों के नाम पर दूसरे पटाखे बेचे जाने के मामले में भी अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। वाहनों से होने वाले प्रदूषण के मुद्दे पर दिवाली की छुट्टियों के बाद अलग से सुनवाई की बात कही गई है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए बढ़ा खतरा
गंभीर प्रदूषण के कारण सांस लेने में परेशानी, खांसी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। अस्थमा और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बच्चों और बुजुर्गों को भी प्रदूषित हवा में अनावश्यक बाहर निकलने से बचना चाहिए।



