मुंबई। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन को लेकर एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि जब बड़े टूर्नामेंट के दौरान सैमसन को प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा गया, तब उनकी प्रतिक्रिया बेहद परिपक्व थी। सैमसन ने अपनी व्यक्तिगत निराशा को पीछे रखते हुए टीम के हित को प्राथमिकता दी, जिससे सूर्यकुमार काफी प्रभावित हुए।
सूर्यकुमार के मुताबिक, टूर्नामेंट की शुरुआत में टीम संयोजन के चलते सैमसन को खेलने का मौका नहीं मिल रहा था। उस समय टीम मैनेजमेंट के सामने कई विकल्प मौजूद थे और दूसरे विकेटकीपर बल्लेबाज को भी लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के कारण प्राथमिकता दी जा रही थी।
ऐसे समय में सैमसन ने कप्तान के फैसले पर सवाल उठाने के बजाय टीम के लक्ष्य पर ध्यान दिया। सूर्यकुमार ने बताया कि दोनों के बीच बातचीत के दौरान सैमसन ने उन्हें साफ कहा था कि कप्तान को वही फैसला लेना चाहिए, जो टीम को जीत दिलाने में मदद करे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जब भी उन्हें मैदान पर उतरने का मौका मिलेगा, वह पूरी तरह तैयार रहेंगे।
सैमसन का यह रवैया सूर्यकुमार को इसलिए भी खास लगा, क्योंकि किसी बड़े टूर्नामेंट में टीम से बाहर बैठना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। इसके बावजूद उन्होंने अपनी जगह को लेकर शिकायत करने के बजाय खुद को अगले मौके के लिए तैयार रखा।
सूर्यकुमार ने सैमसन के साथ अपने पुराने संवाद का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, जब सैमसन मुश्किल दौर से गुजर रहे थे, तब भी उन्होंने बल्लेबाज का मनोबल बढ़ाने की कोशिश की थी। उन्होंने सैमसन को भरोसा दिलाया था कि खराब दौर किसी खिलाड़ी के करियर का अंत नहीं होता और लगातार मेहनत करने पर टीम में वापसी का रास्ता जरूर बनता है।
समय के साथ सैमसन ने अपनी बल्लेबाजी में निरंतरता दिखाई और टीम में अपनी उपयोगिता साबित की। हालांकि, भारतीय क्रिकेट में प्रतिस्पर्धा इतनी ज्यादा है कि हर खिलाड़ी को अपनी जगह बनाए रखने के लिए लगातार प्रदर्शन करना पड़ता है।
सूर्यकुमार के इस खुलासे से सैमसन का एक अलग पहलू सामने आता है। मैदान पर आक्रामक बल्लेबाज के रूप में पहचाने जाने वाले सैमसन टीम से बाहर रहने के दौरान भी सकारात्मक सोच बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं। कप्तान के मुताबिक, उनकी यही सोच उन्हें दूसरे खिलाड़ियों से अलग बनाती है।
सैमसन के लिए आगे भी चुनौती कम नहीं होगी, लेकिन सूर्यकुमार की बातों से साफ है कि भारतीय टीम के भीतर उनके रवैये और क्षमता को लेकर सम्मान बना हुआ है।



