जयपुर। राजस्थान में आगामी निकाय चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में चुनाव के लिए दोनों प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशियों के नाम तय कर लिए हैं। हालांकि, टिकट वितरण के बाद पार्टी के भीतर संभावित असंतोष और बगावत को देखते हुए दोनों दलों ने उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक करने से फिलहाल दूरी बनाई है।
राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट से वंचित दावेदारों को संभालने की है। आशंका है कि सूची सार्वजनिक होने के बाद कई नाराज नेता और कार्यकर्ता निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। इसी वजह से बीजेपी और कांग्रेस ने उम्मीदवारों के नामों को अंतिम समय तक गोपनीय रखने की रणनीति अपनाई है।
बीजेपी की ओर से चयनित प्रत्याशियों को सीधे फोन के माध्यम से टिकट की जानकारी देने की रणनीति अपनाई जा रही है। उम्मीदवारों से समय रहते नामांकन दाखिल करवाने की तैयारी है। पार्टी की कोशिश है कि अधिकृत प्रत्याशी नामांकन पूरा कर लें, ताकि टिकट से नाराज संभावित बागियों को चुनावी मैदान में उतरने और प्रचार की तैयारी के लिए ज्यादा समय न मिले।
पार्टी ने अलग-अलग क्षेत्रों में चुनावी गतिविधियों की निगरानी के लिए जिम्मेदार नेताओं को भी सक्रिय किया है। स्थानीय स्तर पर टिकट को लेकर नाराजगी सामने आने पर वरिष्ठ पदाधिकारी संबंधित दावेदारों से संपर्क कर उन्हें मनाने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी का फोकस संगठन के भीतर असंतोष को चुनाव परिणामों पर असर डालने से रोकने पर है।
कांग्रेस ने भी उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। पार्टी के सामने भी बीजेपी जैसी ही चुनौती है। टिकट के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आने के बाद हर वार्ड में सभी दावेदारों को संतुष्ट करना संभव नहीं है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व संभावित बगावत को रोकने के लिए प्रत्याशियों के नामों को सीमित स्तर पर साझा कर रहा है।
कांग्रेस की ओर से स्थानीय पदाधिकारियों को अधिकृत प्रत्याशियों से संबंधित जरूरी चुनावी प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी की कोशिश है कि नामांकन दाखिल होने के बाद उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट की जाए और इसके बाद आधिकारिक स्तर पर जानकारी सार्वजनिक की जाए।
राजस्थान के 309 निकायों में होने वाले चुनाव दोनों दलों के लिए काफी अहम हैं। शहरी क्षेत्रों में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ संगठन की मजबूती और जमीनी पकड़ की भी परीक्षा होगी। टिकट वितरण के बाद सामने आने वाली नाराजगी को संभालना बीजेपी और कांग्रेस के लिए शुरुआती चुनौती बन गया है।
अब देखना होगा कि नामांकन प्रक्रिया पूरी होने तक दोनों दल कितनी सफलतापूर्वक असंतुष्ट दावेदारों को अपने साथ बनाए रखते हैं। अगर बड़ी संख्या में बागी मैदान में उतरते हैं तो इसका सीधा असर कई निकायों के चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।



