नई दिल्ली (प्रज्ञा पांडे)। तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मील को लेकर एक नई चर्चा शुरू हो गई है। वजह है सरकार का एक ऐसा प्रस्ताव, जिसमें बच्चों की थाली में हफ्ते में एक दिन चिकन बिरयानी शामिल करने की बात कही गई है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो यह राज्य की स्कूल भोजन योजना में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा। स्कूल शिक्षा मंत्री ए. राजमोहन ने मुख्यमंत्री के सामने यह सुझाव रखा है कि बच्चों को दिए जाने वाले दोपहर के भोजन में नए विकल्प जोड़े जा सकते हैं। इसी क्रम में हफ्ते में एक दिन चिकन बिरयानी देने का प्रस्ताव भी रखा गया है। हालांकि अभी यह सिर्फ एक सुझाव है और इसे लागू करने को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
मंत्री का कहना है कि बच्चों को बेहतर और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। तमिलनाडु में स्कूल भोजन योजना का इतिहास काफी पुराना रहा है और समय-समय पर इसमें बदलाव किए जाते रहे हैं। अब सरकार इसमें बच्चों की पसंद और पोषण दोनों को ध्यान में रखते हुए नए विकल्प जोड़ने पर विचार कर रही है। लेकिन इस चर्चा के बीच मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर पुराने सवाल भी फिर सामने आ गए हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में कई बार स्कूलों में दिए जाने वाले भोजन को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ मामलों में बच्चों के खाने में छिपकली, कीड़े या खराब सामग्री मिलने की खबरों ने स्कूल भोजन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में एक तरफ जहां बच्चों की थाली में चिकन बिरयानी जैसे नए विकल्प जोड़ने की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ यह सवाल भी उठ रहा है कि सबसे पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि बच्चों को मिलने वाला खाना सुरक्षित, साफ और गुणवत्ता वाला हो।
तमिलनाडु की स्कूल भोजन योजना पहले भी कई बड़े बदलावों के लिए जानी जाती रही है। अब अगर चिकन बिरयानी का प्रस्ताव मंजूर होता है तो यह देश की सबसे चर्चित स्कूल भोजन योजनाओं में एक नया अध्याय जोड़ सकता है। फिलहाल सबकी नजर सरकार के अगले फैसले पर है। क्या बच्चों की थाली में सच में चिकन बिरयानी शामिल होगी या नहीं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन इस प्रस्ताव ने मिड-डे मील की व्यवस्था, बच्चों के पोषण और खाने की गुणवत्ता को लेकर एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है।



