NCERT Books Row: जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) की कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तकों में कथित बदलावों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इन बदलावों को “संकीर्ण मानसिकता” का परिणाम बताते हुए आरोप लगाया कि इतिहास के तथ्यों को तोड़-मरोड़कर नया राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की जा रही है।
इतिहास को अपने नजरिए से बदलने का प्रयास कर रही है : गहलोत
शुक्रवार को जारी एक बयान में गहलोत ने कहा कि जिस विचारधारा का भारत के स्वतंत्रता संग्राम से कोई संबंध नहीं रहा और जिसने आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं दिया, वही आज सत्ता के बल पर देश के इतिहास को अपने नजरिए से बदलने का प्रयास कर रही है। उनका कहना था कि एनसीईआरटी की पुस्तकों में किए गए हालिया बदलाव इसी सोच का हिस्सा हैं, जो देश के गौरवशाली इतिहास के साथ न्याय नहीं करते।

पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है और अपनी नाकामियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों को लेकर गलत विमर्श तैयार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक मुद्दों पर जवाब देने के बजाय ऐतिहासिक तथ्यों को बदलकर लोगों की सोच प्रभावित करना चाहती है।
गहलोत ने कहा कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम देश की सबसे बड़ी विरासत है और उससे जुड़े तथ्यों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि महान स्वतंत्रता सेनानियों और पूर्वजों के योगदान को कमतर दिखाने या उनके इतिहास को बदलने का कोई भी प्रयास देश की लोकतांत्रिक और ऐतिहासिक परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि देश का युवा वर्ग जागरूक है और वह इतिहास के साथ हो रहे कथित खिलवाड़ तथा राजनीतिक दुष्प्रचार को अच्छी तरह समझता है। उनके अनुसार, शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को तथ्यात्मक और निष्पक्ष जानकारी देना होना चाहिए, न कि किसी विशेष विचारधारा के अनुरूप इतिहास को प्रस्तुत करना।
गहलोत ने केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था और इतिहास लेखन में पारदर्शिता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि इतिहास को राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।



