प्रज्ञा पांडे। 11 जुलाई की दोपहर, स्कूल की घंटी बजते ही दो मासूम बच्चे रोजाना की तरह हंसते-खेलते, अपनी माँ के पास लौटने की खुशी में घर पहुँचे थे। उन्हें रत्ती भर भी अंदाज़ा नहीं था कि दरवाज़े के उस पार उनका स्वागत माँ की ममतामयी गोद नहीं, बल्कि ज़मीन पर बिखरा खून और एक ख़ौफ़नाक सन्नाटा करेगा। जैसे ही बच्चों ने घर के अंदर कदम रखा, उनकी चीख निकल गई। अंदर पोस्टल असिस्टेंट उर्मिला सैनी का शव लहूलुहान हालत में पड़ा था। उर्मिला पर बेहद बेरहमी से हमला किया गया था। फॉरेंसिक जांच और शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, कातिल ने उर्मिला के सिर पर किसी भारी चीज़ से ज़ोरदार वार किया था और इतने से भी मन न भरा तो उसका जबड़ा तक तोड़ दिया।
पति पर मंडराता शक और चकमे की साज़िश
घटना के बाद से ही उर्मिला का पति अखिलेश सैनी रहस्यमयी तरीके से गायब था। पुलिस के शक की सुई सीधे उसी पर जाकर टिकी। वारदात की साज़िश इतनी शातिर थी कि अखिलेश पुलिस को चकमा देने के लिए अपना मोबाइल फोन घर पर ही छोड़ गया था, ताकि उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके। पुलिस की कई टीमें शहर-शहर उसकी तलाश में खाक छान रही थीं।
गंजबासौदा में रेलवे ट्रैक पर मिला जवाब
पुलिस अभी अखिलेश की सुरागकशी में लगी ही थी कि तभी गंजबासौदा के पास रेलवे ट्रैक से आई एक खबर ने मामले को नया मोड़ दिया। पत्नी की बेरहमी से हत्या करने के बाद फरार हुए अखिलेश सैनी का शव रेलवे ट्रैक पर मिला। उसने ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। जिस शक की आग में उसने पत्नी को मौत के घाट उतारा, उसी खौफनाक अपराध के बोझ तले दबकर उसने खुद भी आत्मघाती कदम उठा लिया।
सुसाइड के साथ दफ़न हो गए कई अनसुलझे राज़
अखिलेश के इस आत्मघाती कदम ने पुलिसिया तफ़तीश के सामने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह गुत्थी सुलझाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है कि क्या यह महज़ घरेलू कलह और अंधाधुंध शक का खौफनाक अंजाम था, या फिर इस कत्ल और खुदकुशी के पीछे कोई ऐसा गहरा अनसुलझा राज़ छिपा है जिसे अखिलेश अपने साथ ही हमेशा के लिए ले गया। फिलहाल पुलिस डिजिटल सर्विलांस, कॉल डिटेल्स और रिश्तेदारों के बयानों को खंगालकर यह पता लगाने की हर संभव कोशिश कर रही है कि आखिर वारदात से ठीक पहले ऐसा क्या घटित हुआ था, जिसने हंसते-खेलते पूरे परिवार को एक ही पल में राख के ढेर में बदल दिया।
बेकसूर मासूमों की क्या गलती थी?
इस पूरी खूनी दास्तान का सबसे दर्दनाक पहलू वे दो मासूम बच्चे हैं। एक ही झटके में उनके सिर से माँ का आँचल भी छीन गया और पिता का साया भी उठ गया। शक और वहशियत के इस खेल में उन दो बेकसूर बच्चों का क्या कसूर था? जो कल तक अपने माता-पिता के साथ एक खुशहाल ज़िंदगी जी रहे थे, वे आज इस बेरहम दुनिया में बिल्कुल अकेले खड़े हैं। रिश्तेदार स्तब्ध हैं और कॉलोनी के लोग दहशत में। पुलिस भले ही इसे ‘मर्डर और सुसाइड’ का मामला मानकर फाइल बंद करने की ओर बढ़े, लेकिन उन मासूमों के दिलों पर लगा यह ज़ख्म शायद ज़िंदगी भर नहीं भर पाएगा।



