नई दिल्ली। CJP प्रोटेस्ट से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में दर्ज FIR को रद्द करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश पारित किया। सुप्रीम कोर्ट ने पांच राज्यों की ओर से FIR रद्द करने के लिए दाखिल आवेदनों को भी स्वीकार कर लिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित FIR पर अब आगे कोई कार्रवाई या जांच जारी नहीं रहेगी और इन्हें सभी उद्देश्यों के लिए बंद माना जाएगा।
20 से 26 जुलाई की घटनाओं पर नई FIR नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि 20 से 26 जुलाई के बीच हुई घटनाओं को लेकर अब कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाए। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को 2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति दी है। इन लोगों के नाम अदालत के समक्ष दाखिल आवेदन में शामिल बताए गए हैं। यदि जांच में इन लोगों की दो अपराधों में संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ नई FIR दर्ज की जा सकती है। अदालत ने यह भी साफ किया है कि ऐसी FIR दर्ज होने से संबंधित लोगों के कानूनी उपाय अपनाने के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।
देशभर में बनेगा मुआवजे का फ्रेमवर्क
प्रदर्शन से जुड़े मामलों के अलावा सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में मुआवजे की व्यवस्था तैयार करने का भी निर्देश दिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श कर मुआवजे के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क तैयार करने को कहा है। इस व्यवस्था को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियमित मुआवजा तंत्र के रूप में लागू किया जाएगा।
NEET 2026 मामलों में भी मुआवजे का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने NEET 2026 से जुड़े आत्महत्या के मामलों में भी मुआवजे को लेकर निर्देश जारी किया है। केंद्र सरकार को ऐसे मामलों में तीन महीने के भीतर मुआवजा देने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
CJP ने फैसले को बताया ऐतिहासिक
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CJP के प्रवक्ता ने अदालत का आभार जताया। उन्होंने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि शीर्ष अदालत का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है। इस आदेश के बाद 20 से 25 जुलाई के प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में दर्ज FIR पर आगे की कार्रवाई रुक जाएगी, जबकि अदालत द्वारा विशेष रूप से बताए गए 2,873 लोगों को लेकर अलग कानूनी प्रक्रिया की संभावना बनी रहेगी।



