Raja Raghuvanshi Murder Case : नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 2025 में हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या करने की आरोपी सोनम रघुवंशी को दी गई जमानत बृहस्पतिवार को रद्द कर दी। शीर्ष अदालत ने सोनम को जमानत दिए जाने के खिलाफ मेघालय सरकार की याचिका स्वीकार कर ली। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ ने सोनम को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि यदि मुकदमे की सुनवाई आगे नहीं बढ़ती और छह महीने के भीतर पूरी नहीं होती है तो सोनम नयी जमानत याचिका दायर कर सकती है।
मध्य प्रदेश के इंदौर की निवासी सोनम को उसके कारोबारी पति राजा रघुवंशी की हत्या के सिलसिले में पिछले वर्ष जून में गिरफ्तार किया गया था। यह दंपति पिछले वर्ष 23 मई को मेघालय के सोहरा क्षेत्र में छुट्टियां मनाने के दौरान लापता हो गया था। बाद में दो जून 2025 को राजा का शव एक गहरी खाई से बरामद किया गया था। पुलिस ने आरोप लगाया है कि सोनम ने भाड़े के हमलावरों के साथ मिलकर आर्थिक लाभ के लिए अपने पति की हत्या की साजिश रची थी।

मेघालय सरकार की चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी है। अदालत ने मेघालय सरकार की याचिका स्वीकार करते हुए सोनम को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मुकदमे की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी नहीं होती है, तो वह नई जमानत याचिका दायर कर सकती हैं।
सरकार ने तकनीकी आधार पर मिली जमानत का किया विरोध
मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में दलील दी कि जमानत केवल एक तकनीकी त्रुटि के आधार पर दी गई थी। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेज में केवल एक कानूनी धारा का नंबर टाइप करने में गलती हुई थी, जिसे जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता। सरकार ने यह भी आशंका जताई कि जमानत जारी रहने पर आरोपी के फरार होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले दिए थे दो विकल्प
पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोनम के वकील के सामने दो विकल्प रखे थे। अदालत ने पूछा था कि क्या सोनम स्वेच्छा से सरेंडर करेंगी या फिर कोर्ट उनकी जमानत रद्द करने पर फैसला सुनाएगा। अंतिम सुनवाई में अदालत ने जमानत निरस्त करते हुए तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर का आदेश जारी कर दिया।

बचाव पक्ष ने रखे ये तर्क
सोनम रघुवंशी के वकील ने जमानत बनाए रखने की मांग करते हुए कहा कि मामले में कुल 94 गवाह हैं, लेकिन अब तक केवल चार गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं। उन्होंने बताया कि सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और सोनम सभी जमानत शर्तों का पालन कर रही हैं। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उनके फरार होने की कोई आशंका नहीं है।
गिरफ्तारी बनाम सरेंडर पर बहस
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दावा किया कि सोनम ने आत्मसमर्पण नहीं किया था, बल्कि उन्हें उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था। वहीं मेघालय सरकार ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि रिकॉर्ड और चार्जशीट में आरोपी के सरेंडर का उल्लेख है। सरकार का कहना था कि गिरफ्तारी संबंधी तकनीकी आपत्ति का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है।
सोनम ने खुद को बताया निर्दोष
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में सोनम रघुवंशी ने खुद को बेगुनाह बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और अभियोजन पक्ष का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। उनका तर्क था कि केवल आरोप लगने से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करना होगा, जबकि मामले की सुनवाई आगे जारी रहेगी।



