Tuesday, July 14, 2026
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राजस्थान में 15 जुलाई से गर्भवती महिलाओं की विशेष स्वास्थ्य स्क्रीनिंग, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी पर रहेगा फोकस

राजस्थान सरकार 15 जुलाई से पांच दिवसीय विशेष अभियान चलाकर सभी गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग करेगी। अभियान में एएनसी जांच, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान, नियमित निगरानी और समयबद्ध उपचार सुनिश्चित किया जाएगा। मातृ मृत्यु के प्रत्येक मामले की 24 घंटे में समीक्षा होगी, जबकि लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

Rajasthan Pregnancy Screening Campaign : जयपुर। प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने तथा मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से राज्य सरकार 15 जुलाई से पांच दिवसीय विशेष स्क्रीनिंग अभियान शुरू करेगी। इस दौरान सभी गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व स्वास्थ्य जांच की जाएगी और उनके स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण मानकों का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। साथ ही नियमित निगरानी कर जोखिम वाली गर्भवतियों की समय पर पहचान और आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया जाएगा।

प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने मंगलवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित बैठक में इस संबंध में प्रदेश के सभी चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फील्ड में कार्यरत आशा वर्कर, एएनएम एवं सीएचओ के माध्यम से स्क्रीनिंग का यह कार्य पूरी संवेदनशीलता एवं गंभीरता के साथ करवाया जाए। गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच एवं नियमित स्क्रीनिंग में किसी भी तरह की लापरवाही पर आशा वर्कर, एएनएम, सीएचओ एवं संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। बैठक में चिकित्सा शिक्षा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, निदेशालय स्तर के अधिकारियों सहित सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, आरसीएचओ, ब्लॉक स्तरीय अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े।

प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि मातृ मृत्यु की प्रत्येक घटना अत्यंत गंभीर है और इसे रोकने के लिए गर्भावस्था की शुरुआत से लेकर प्रसव एवं प्रसवोत्तर अवधि तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि अधिकांश मातृ मृत्यु के मामलों में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) की पहचान और समयबद्ध प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रत्येक गर्भवती महिला का गर्भधारण के प्रथम 12 सप्ताह के भीतर पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए तथा सभी सूचनाएं पीसीटीएस पोर्टल पर समय पर दर्ज की जाएं।

अनिवार्य रूप से हो एएनसी जांच

राठौड़ ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला की कम से कम चार गुणवत्तापूर्ण एएनसी जांच अनिवार्य रूप से कराई जाए। जांच के दौरान रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, वजन, मूत्र परीक्षण, रक्त शर्करा तथा अन्य आवश्यक परीक्षण किए जाएं और उनका रिकॉर्ड नियमित रूप से अद्यतन रखा जाए। उन्होंने सभी जिलों को हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान कर उनका अलग ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने के निर्देश दिए। एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, पूर्व सिजेरियन, जुड़वां गर्भ, अत्यधिक रक्तस्राव तथा अन्य जटिलताओं वाले मामलों को चिन्हित कर नियमित फॉलोअप सुनिश्चित करने को कहा। प्रत्येक एचआरपी महिला की नामवार सूची उपस्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला स्तर तक उपलब्ध रखने तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए।

मातृ मृत्यु की प्रत्येक घटना का 24 घंटे के भीतर होगा प्रारंभिक रिव्यू

बैठक में जिलों में मातृ मृत्यु की प्रत्येक घटना का 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक विश्लेषण तथा नियमानुसार मैटरनल डेथ रिव्यू कराने, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी और मातृ मृत्यु की साप्ताहिक समीक्षा करने तथा लापरवाही पाए जाने पर जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि कोई भी गर्भवती महिला एएनसी जांच, हीमोग्लोबिन जांच, टीकाकरण अथवा संस्थागत प्रसव से वंचित नहीं रहनी चाहिए। सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक जीवनरक्षक दवाओं, रक्त की उपलब्धता, प्रसव कक्ष, ऑपरेशन थियेटर तथा नवजात पुनर्जीवन उपकरणों को पूर्ण रूप से कार्यशील स्थिति में रखा जाए। बैठक में अधिकारियों को सुरक्षित मातृत्व सेवाओं के लिए जारी मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) और राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार के लिए नियमित मॉनिटरिंग और फील्ड स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही होने पर संबंधित अधिकारियों एवं कार्मिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने एएनसी और एचआरपी के बारे में जिलों के चिकित्साधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक प्रसूता की एचआरपी पर निगरानी रखना जरूरी है तथा रेफरल केस में रेफरल पर्ची के साथ सम्पूर्ण चिकित्सकीय विवरण भेजें। उन्होंने प्रजेन्टेशन के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की जांच एवं उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम ने कहा कि लेबर रूम और ओटी के लिए पूर्व में ही निर्देश जारी किए जा चुके हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी इसकी पालना सुनिश्चित करावें और समय-समय पर सेनेटाइज भी कराएं। बैठक में अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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Mukesh Kumar
Mukesh Kumarhttps://jagoindiajago.news/
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