Friday, August 7, 2026
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बच्चों की सुरक्षा पर Meta को झटका, US कोर्ट ने लगाया 567 मिलियन डॉलर का जुर्माना!

अमेरिका के न्यू मैक्सिको कोर्ट ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा में लापरवाही के मामले में Meta पर 567 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया। कुल देनदारी अब 942 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई।

नई दिल्ली (प्रज्ञा पांडे)। सोशल मीडिया दिग्गज Meta को अमेरिका में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। न्यू मैक्सिको की अदालत ने कंपनी को 567 मिलियन डॉलर (करीब 4,700 करोड़ रुपये) का भुगतान करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने माना कि Meta अपने प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पर्याप्त कदम उठाने में विफल रही। इस नए आदेश के बाद मामले में Meta की कुल वित्तीय देनदारी 942 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला Meta के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook और Instagram से जुड़ा है। न्यू मैक्सिको में दायर मुकदमे में आरोप लगाया गया था कि कंपनी ने बच्चों और किशोरों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए। अदालत ने माना कि कंपनी के प्लेटफॉर्म्स का बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर खामियां रहीं। इससे पहले इसी मामले में जूरी Meta पर 375 मिलियन डॉलर का सिविल जुर्माना लगा चुकी थी। अब 567 मिलियन डॉलर के नए आदेश के बाद कुल राशि 942 मिलियन डॉलर हो गई है।

कोर्ट ने Meta को क्या निर्देश दिए?

आर्थिक दंड के अलावा अदालत ने कंपनी को बच्चों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं। इनमें शामिल हैं- बच्चों के लिए बेहतर ऑनलाइन सुरक्षा प्रणाली विकसित करना, Age Verification प्रक्रिया को और मजबूत बनाना, हानिकारक कंटेंट और ऑनलाइन शोषण रोकने के लिए सख्त उपाय लागू करना, बच्चों और अभिभावकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाना।

Meta ने फैसले पर क्या कहा?

Meta ने अदालत के फैसले से असहमति जताई है और कहा है कि कंपनी इस आदेश के खिलाफ अपील करेगी। कंपनी का कहना है कि वह पहले से ही बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है और Facebook व Instagram पर कई नए सुरक्षा फीचर्स लागू किए गए हैं। Meta का दावा है कि वह प्लेटफॉर्म को युवाओं के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

क्यों अहम है यह फैसला?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल Meta तक सीमित नहीं रहेगा। दुनिया भर में सोशल मीडिया कंपनियों पर बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने का दबाव लगातार बढ़ रहा है। यह मामला भविष्य में अन्य टेक कंपनियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सुरक्षा नीतियों में बड़े बदलाव का कारण बन सकता है।

टेक कंपनियों की बढ़ेगी जवाबदेही

इस फैसले ने साफ संकेत दिया है कि अब सोशल मीडिया कंपनियों का मूल्यांकन केवल यूजर्स की संख्या या मुनाफे से नहीं होगा, बल्कि इस बात से भी होगा कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर बच्चों और किशोरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कितनी जिम्मेदारी निभाती हैं।

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