जयपुर। राजस्थान की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद डॉ. सतीश पूनिया का कद केंद्रीय संगठन में लगातार बढ़ता जा रहा है। बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने महज दो दिनों के भीतर डॉ. पूनिया को दो अहम और बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारियाँ सौंपकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। सोमवार को पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में ‘राष्ट्रीय महामंत्री’ नियुक्त किए जाने के ठीक 24 घंटे बाद, मंगलवार 18 अगस्त को उन्हें पंजाब राज्य का नया ‘प्रदेश प्रभारी’ बना दिया गया है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के निर्देशों पर पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी और राज्यसभा सांसद तरुण चुग द्वारा तीन प्रमुख राज्यों के नए प्रभारियों की आधिकारिक सूची जारी की गई। इस नई सूची के तहत उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात में नए प्रभारियों का ऐलान किया गया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। नई व्यवस्था के तहत उत्तर प्रदेश का प्रभारी राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े को और गुजरात का प्रभारी तरुण चुग को बनाया गया है।
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24 घंटे में दो बड़े पद: जानिए पूनिया के बढ़ते राजनीतिक कद की वजह
राजस्थान में जाट समुदाय के एक प्रभावशाली चेहरे के रूप में पहचाने जाने वाले डॉ. सतीश पूनिया के लिए पिछला कुछ समय सांगठनिक उपलब्धियों से भरा रहा है। हाल ही में पार्टी ने उन्हें राजस्थान से राज्यसभा भेजकर संसद के उच्च सदन का हिस्सा बनाया था। इसके बाद सोमवार को उन्हें केंद्रीय संगठन में राष्ट्रीय महामंत्री का दायित्व सौंपा गया और मंगलवार को पंजाब जैसा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और सीमावर्ती राज्य उनके हवाले कर दिया गया।
डॉ. पूनिया को पंजाब की कमान सौंपने के पीछे सबसे बड़ी वजह उनका हरियाणा और दिल्ली का शानदार सांगठनिक ट्रैक रिकॉर्ड माना जा रहा है। 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में जब किसान आंदोलन और स्थानीय असंतोष के चलते भाजपा की राह कठिन मानी जा रही थी, तब प्रदेश प्रभारी के रूप में पूनिया की चुनावी रणनीति ने बड़ा काम किया। भाजपा ने 48 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार हरियाणा में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। इसके बाद 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी उन्हें नजफगढ़ जिले की 5 सीटों के चुनाव प्रबंधन की कमान मिली थी, जहाँ पार्टी ने 100% स्ट्राइक रेट के साथ पाँचों सीटों पर जीत दर्ज की।
पंजाब में चुनौतियाँ और सतीश पूनिया का ट्रैक रिकॉर्ड
पंजाब से पहले डॉ. पूनिया की भूमिकाओं और उनके चुनावी प्रदर्शन पर नजर डालें तो उनका ट्रैक रिकॉर्ड बेहद प्रभावी रहा है:
| राज्य / क्षेत्र | अवधि | भूमिका | परिणाम / प्रदर्शन |
| हरियाणा | 2024–2026 | लोकसभा चुनाव प्रभारी व प्रदेश प्रभारी | 2024 विधानसभा चुनाव में 48 सीटें जीतकर BJP की हैट्रिक |
| दिल्ली | 2025 | 5 विधानसभा सीटों का चुनाव प्रबंधन | 5 में से 5 सीटों पर भाजपा की ऐतिहासिक जीत |
| राजस्थान | 2019–2023 | प्रदेश भाजपा अध्यक्ष | संगठन का मजबूत विस्तार और 2023 में सत्ता में वापसी की नींव |
| पंजाब | 2026 से आगे | नया प्रदेश प्रभारी | 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में संगठन विस्तार की बड़ी परीक्षा |

पंजाब के सियासी समीकरण और राजस्थान पर असर
पंजाब में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिहाज से डॉ. पूनिया की यह नियुक्ति काफी मायने रखती है। पंजाब में इस समय आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार है, जबकि कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (SAD) भी अपनी जमीन तलाश रहे हैं। ऐसे में भाजपा के लिए ग्रामीण पंजाब और सिख बहुल इलाकों में संगठन की स्वीकार्यता बढ़ाना, किसान वर्ग के बीच संवाद स्थापित करना और बूथ स्तर तक कैडर तैयार करना सबसे पहली प्राथमिकता होगी।
दूसरी ओर, राजस्थान की राजनीति के दृष्टिकोण से भी यह फेरबदल काफी अहम है। राजस्थान में अगले ढाई साल में विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले स्थानीय निकाय व पंचायती राज चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में सतीश पूनिया को केंद्रीय संगठन में मिली यह दोहरी ताकत राज्य भाजपा के भीतर क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को गहराई से प्रभावित करेगी।



