मुंबई (प्रज्ञा पांडे )। मुंबई की फिल्मी गलियों में एक नाम ऐसा है, जिसकी जिंदगी खुद एक फिल्म जैसी लगती है। कभी करोड़ों दिलों पर राज करने वाला सुपरस्टार, कभी विवादों के बीच घिरा इंसान और फिर हर मुश्किल को पीछे छोड़कर दोबारा खड़ा हुआ अभिनेता…यह कहानी है संजय दत्त की। आज जब ‘संजू बाबा’ 67 साल के हो गए हैं, तो उनकी जिंदगी के उन पन्नों को पलटते हैं, जहां सिर्फ ग्लैमर नहीं, बल्कि दर्द, गलतियां, रिश्ते और संघर्ष भी दिखाई देते हैं। संजय दत्त का जन्म भले ही बॉलीवुड के सबसे बड़े परिवार में हुआ, लेकिन उनकी जिंदगी हमेशा आसान नहीं रही। पिता सुनील दत्त और मां नरगिस जैसी दिग्गज हस्तियों के बेटे होने के कारण बचपन में उन्हें खूब प्यार मिला। लेकिन यही ज्यादा लाड़-प्यार बाद में परिवार के लिए चिंता का कारण भी बना। कहा जाता है कि संजय की बढ़ती शरारतों और जिद को देखते हुए परिवार ने फैसला किया कि उन्हें अनुशासन वाले माहौल में रखा जाए। इसी सोच के साथ उन्हें लॉरेंस स्कूल सनावर भेजा गया, जहां उन्हें जिम्मेदारी और अनुशासन सीखने का मौका मिला। लेकिन जिंदगी ने जल्द ही एक ऐसा मोड़ लिया, जिसने संजय को अंदर तक बदल दिया।

1980 के दशक की शुरुआत में जब उनकी पहली फिल्म ‘रॉकी’ रिलीज होने वाली थी, उसी समय उनकी मां नरगिस गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। एक तरफ बेटे का करियर शुरू हो रहा था, तो दूसरी तरफ परिवार अपनी सबसे बड़ी ताकत को खोने के डर से गुजर रहा था। नरगिस दत्त अपने बेटे को बड़ा स्टार बनते देखना चाहती थीं। उन्होंने ‘रॉकी’ के कुछ हिस्से देखे भी, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। फिल्म रिलीज होने से पहले ही उनका निधन हो गया। इसके बाद संजय दत्त की जिंदगी में ऐसा दौर आया, जिसने उन्हें लंबे समय तक परेशान किया। उन्होंने खुद स्वीकार किया कि वह नशे की समस्या से जूझ रहे थे। यह उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाइयों में से एक थी। लेकिन संजय दत्त की कहानी सिर्फ गलतियों की कहानी नहीं है।
उनकी जिंदगी में कई विवाद आए। रिश्तों को लेकर चर्चाएं हुईं, गुस्से से जुड़े किस्से सामने आए और फिर 1993 के मुंबई बम धमाकों से जुड़े मामले ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी। जब एक सुपरस्टार जेल पहुंचा, तो उनके करोड़ों फैंस के लिए यह यकीन करना मुश्किल था। जेल में बिताए दिनों का एक किस्सा आज भी लोगों को भावुक कर देता है। रक्षाबंधन के मौके पर जब उनकी बहनें उनसे मिलने पहुंचीं, तो संजय के पास गिफ्ट में देने के लिए कोई महंगा तोहफा नहीं था। उन्होंने जेल कैंटीन के छोटे-से कूपन बहनों को दे दिए। उस पल में बॉलीवुड का बड़ा सितारा नहीं, बल्कि एक भाई दिखाई दे रहा था।

वहीं दूसरी तरफ संजय दत्त का दोस्ती वाला अंदाज भी हमेशा चर्चा में रहा। सलमान खान के साथ उनकी दोस्ती बॉलीवुड की सबसे मशहूर दोस्तियों में से एक है। सलमान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने संजय को BMW गिफ्ट की थी और मजाकिया अंदाज में संजय ने उसकी चाबी समुद्र में फेंक दी थी। संजय दत्त की जिंदगी में ऐसे कई किस्से हैं जो उन्हें एक आम इंसान की तरह दिखाते हैं। ऐसा इंसान जिसने गलतियां कीं, मुश्किलों का सामना किया और फिर खुद को साबित किया। ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ के मुरली प्रसाद शर्मा से लेकर ‘वास्तव’ के रघु तक, संजय दत्त ने पर्दे पर भी ऐसे किरदार निभाए जो लोगों के दिलों में बस गए। शायद यही वजह है कि संजय दत्त सिर्फ एक अभिनेता नहीं हैं। वह एक ऐसी कहानी हैं जिसमें चमक भी है, अंधेरा भी…गिरना भी है और फिर उठकर खड़े होना भी। और यही उनकी जिंदगी को बाकी सितारों से अलग बनाता है।



