काठमांडू। नेपाल में भीषण बाढ़ की तबाही के बाद अब एक और खतरा सामने आया है। भोटेकोशी नदी के आसपास बाढ़ के कारण बनी झील का जलस्तर लगातार बढ़ने की सूचना है। इसके चलते झील के अचानक फटने और दोबारा बड़े पैमाने पर बाढ़ आने की आशंका जताई गई है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने लोगों के साथ राहत और बचाव कार्य में जुटे कर्मियों को नदी के किनारों से दूर रहने की चेतावनी दी है।
उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों के विश्लेषण में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पानी जमा होने से एक झील बनने की पुष्टि हुई है। अधिकारियों के अनुसार, यदि इसका प्राकृतिक अवरोध टूटता है तो तेज बहाव के साथ पानी नीचे के इलाकों में पहुंच सकता है। इसी वजह से संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई थी। भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में जलस्तर बढ़ने के बाद बड़ी संख्या में लोग लापता बताए गए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मृतकों की संख्या 353 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 800 लोगों के लापता होने की खबर है।
चीन की ओर सीमा क्षेत्र में 200 से अधिक भारतीय नागरिकों के फंसे होने की जानकारी सामने आई थी। राहत अभियान के दौरान 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि अन्य लापता लोगों की तलाश जारी है। आपदा की गंभीरता को देखते हुए भारत ने भी राहत प्रयास तेज किए हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अनुसार, नेपाल के लिए जरूरी दवाओं के साथ करीब 10 टन मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री भेजी गई है।
नेपाल में बाढ़ का असर भारत के सीमावर्ती राज्यों पर भी पड़ने की आशंका है। गंडक नदी बेसिन में जलस्तर बढ़ने के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश में अलर्ट जारी किया गया है। संवेदनशील इलाकों में प्रशासन को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। संभावित स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ की टीमों को भी तैयार रखा गया है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से बातचीत कर नदियों के जलस्तर तथा सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी ली। अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत-बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।



