नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन से इतर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं की बातचीत में भारत-रूस संबंधों के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े अहम मुद्दे शामिल रहेंगे। बैठक में आर्थिक सहयोग और दोनों देशों के बीच व्यापार को आगे बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान रहने की संभावना है।
प्रधानमंत्री 29 अगस्त से उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा पर रहेंगे। वह 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान में रहेंगे। इसके बाद किर्गिस्तान पहुंचकर 31 अगस्त से 1 सितंबर तक होने वाले SCO शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में सदस्य देशों के नेताओं के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श होगा। मोदी-पुतिन बैठक की तैयारी की पृष्ठभूमि में हाल में विदेश मंत्री एस. जयशंकर की रूस यात्रा भी महत्वपूर्ण है। रूस में जयशंकर ने राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की थी।
उस दौरान पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी से SCO सम्मेलन के दौरान मुलाकात की इच्छा जताई थी और जयशंकर से मोदी तक अपनी शुभकामनाएं पहुंचाने को कहा था।दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंध बैठक के प्रमुख विषयों में रह सकते हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के बीच रूस ने भारत को ऊर्जा और उर्वरकों की आपूर्ति जारी रखने का भरोसा दिया है। पुतिन ने भारत के कृषि क्षेत्र के लिए उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर आपूर्ति बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई थी।
रूस के राष्ट्रपति के अनुसार, 2025 में कुछ कमी के बाद इस वर्ष भारत-रूस व्यापार में बढ़ोतरी हुई है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति सहित कई आर्थिक मुद्दों पर चर्चा चल रही है। ऐसे में मोदी और पुतिन की बैठक में व्यापार को और गति देने के उपायों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
उज्बेकिस्तान में भी अहम बैठक
प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा की शुरुआत उज्बेकिस्तान से करेंगे। वहां वह राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। बैठक का उद्देश्य भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना और द्विपक्षीय सहयोग के नए क्षेत्रों पर आगे बढ़ना होगा।
इसके बाद SCO सम्मेलन में मोदी की भागीदारी क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भारत का रुख सामने रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।



