Bashir Badr death : मुंबई। उर्दू की दुनिया से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मशहूर शायर बशीर बद्र का 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन से साहित्य और शायरी की दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई है। बशीर बद्र अपनी आसान और दिल को छू लेने वाली शायरी के लिए जाने जाते थे। उनकी रचनाओं में इंसानी भावनाएं, रिश्तों की गहराई और जिंदगी के अनकहे पहलुओं की खूबसूरत झलक मिलती थी। उनकी शायरी की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह बेहद सरल भाषा में गहरी बातें कह जाते थे, जो सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचती थीं।
जावेद अख्तर ने जताया दुख
उनके निधन पर बॉलीवुड के मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने गहरा दुख जताया। जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया पर भावुक श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, “आज हमारी उर्दू भाषा थोड़ी और गरीब हो गई। बेहद मधुर शायर बशीर बद्र अब हमेशा के लिए इस महफिल से रुखसत हो चुके हैं। वे और उनकी शायरी हमेशा लोगों की यादों में जिंदा रहेंगे।”
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में’
शायरी से लोगों के दिलों पर छाए बशीर बद्र
शायरी से लोगों के दिलों पर छाए बशीर बद्र
बशीर बद्र का निधन सिर्फ उर्दू शायरी की दुनिया के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए गहरा भावनात्मक नुकसान है, जिसने कभी उनके शब्दों में अपने दिल की आवाज सुनी हो। बशीर बद्र की शायरी में प्यार, तन्हाई, दर्द, बिछड़न और जिंदगी की गहरी उदासी बेहद खूबसूरती से झलकती थी। रिश्तों की नजाकत और इंसानी भावनाओं को शब्दों में पिरोने की उनकी कला उन्हें बाकी शायरों से अलग बनाती थी।
उनकी गजलें और शेर आम आदमी के जख्मों, संघर्षों और अंदर छिपे एहसासों का आईना हुआ करते थे। शायद यही वजह थी कि लोग उनकी शायरी से खुद को आसानी से जोड़ लेते थे। महफिलों से लेकर सोशल मीडिया तक, उनके शेर हर दौर में लोगों की जुबां पर छाए रहे। बशीर बद्र की कविताओं में एक ऐसी सादगी और गहराई थी, जो किसी शांत बहते निर्मल जल की तरह सीधे दिल में उतर जाती थी। उनकी रचनाएं सिर्फ पढ़ी नहीं जाती थीं, बल्कि महसूस की जाती थीं। यही कारण है कि उनका लिखा हुआ हर शब्द आज भी लोगों की भावनाओं में जिंदा है और हमेशा अमर रहेगा।
पद्म श्री से सम्मानित हुए शायर बशीर बद्र
मशहूर शायर बशीर बद्र को उनकी बेहतरीन शायरी और साहित्य में अमूल्य योगदान के लिए देश-विदेश में खूब सम्मान मिला। भारत सरकार ने उन्हें साल 1999 में देश के प्रतिष्ठित सम्मान पदम श्री से नवाजा था। इसके अलावा साहित्य और कला के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें संगीत नाटक अकादमी सम्मान से भी सम्मानित किया गया। उनकी चर्चित शायरी संग्रह ‘आस’ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला था।
डॉ. बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को अयोध्या में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से बी.ए., एम.ए. और पीएचडी की पढ़ाई पूरी की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने इसी यूनिवर्सिटी में लेक्चरर के रूप में अपने अकादमिक करियर की शुरुआत की। बशीर बद्र ने अपनी शायरी के जरिए सिर्फ साहित्य को समृद्ध नहीं किया, बल्कि आम लोगों की भावनाओं को भी अपनी कलम से आवाज दी।



