Monday, July 20, 2026
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कठिनाइयों के बावजूद नहीं मानी हार, रंगाई-पुताई करने वाले सूरज ने NEET में हासिल किए 99.16 पर्सेंटाइल

NEET Success Story: राजस्थान के बूंदी निवासी 19 वर्षीय सूरज सैनी ने आर्थिक तंगी और रंगाई-पुताई का काम करते हुए NEET 2026 में 99.16 पर्सेंटाइल हासिल कर प्रेरणादायक मिसाल पेश की। उन्होंने 583 अंक, ऑल इंडिया रैंक 16,569 और ओबीसी रैंक 7,800 प्राप्त की।

NEET Success Story: राजस्थान के बूंदी जिले के 19 वर्षीय सूरज सैनी ने संघर्ष, मेहनत और हौसले की ऐसी मिसाल पेश की है, जो हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है. परिवार की आर्थिक मदद के लिए वर्षों तक रंगाई-पुताई का काम करने वाले सूरज ने NEET 2026 में 99.16 पर्सेंटाइल हासिल कर डॉक्टर बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है. सूरज ने 583 अंक प्राप्त करते हुए अखिल भारतीय स्तर पर 16,569वीं रैंक और ओबीसी श्रेणी में 7,800वीं रैंक हासिल की है. जिससे अब उसे किसी भी प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज में आसानी से दाखिला मिल सकेगा.

कठिनाइयों के बावजूद नहीं मानी हार

बूंदी जिले के कापरेन कस्बे के रहने वाले सूरज का बचपन आर्थिक तंगी और पारिवारिक कठिनाइयों के बीच बीता. माता-पिता के अलग होने के बाद वह अपनी मां घीसी बाई और छोटी बहन गरिमा के साथ ननिहाल में रहने लगा. उनकी मां खेतिहर मजदूर हैं, जबकि आर्थिक अभाव के कारण बहन को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी. इन कठिन परिस्थितियों में सूरज ने पढ़ाई के साथ-साथ अपने मामा से रंगाई-पुताई का काम सीखा और छुट्टियों व स्कूल के बाद काम करके घर का खर्च चलाने में मां का हाथ बंटाया.

सरकारी स्कूल से मेडिकल कॉलेज तक का सफर

सूरज ने आठवीं तक की पढ़ाई कापरेन के सरकारी स्कूल से की और बाद में तालेड़ा क्षेत्र के अलकोदिया गांव के स्कूल में पढ़ाई जारी रखी. उसने कक्षा 10वीं में 87 प्रतिशत और 12वीं में 85 प्रतिशत अंक हासिल किए. जोधपुर के स्वास्थ्य विभाग में एएनएम के पद पर कार्यरत अपनी मौसी से प्रेरित होकर उन्होंने जीव विज्ञान विषय चुना और डॉक्टर बनने का सपना देखा.

मां की मेहनत बनी प्रेरणा

सूरज का कहना है कि खेतों में दिनभर मेहनत करती अपनी मां को देखकर ही उन्होंने डॉक्टर बनने का संकल्प लिया. उन्होंने कहा, ‘मैं अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकालना चाहता था. आर्थिक तंगी की वजह से मेरी बहन की पढ़ाई छूट गई, लेकिन अब मैं सुनिश्चित करूंगा कि वह दोबारा अपनी शिक्षा पूरी करे.’ सूरज ने बताया कि मां की मजदूरी और पुताई के काम से बचाए गए पैसों से परिवार ने कुछ वर्ष पहले दो कमरों का अपना छोटा-सा घर बनाया, जिसकी पुताई उन्होंने स्वयं की थी.

तीसरे प्रयास में मिली सफलता

सूरज ने पहली बार 2024 में 12वीं के साथ NEET परीक्षा दी. इसके बाद उन्होंने एक साल स्वयं तैयारी की और 2025 में दूसरी बार परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली. बाद में उसका चयन एलन करियर इंस्टीट्यूट और एलएन माहेश्वरी परमार्थ ट्रस्ट के ‘शिक्षा संबल कार्यक्रम’ में हुआ. इस योजना के तहत उन्हें नि:शुल्क कोचिंग और रहने की सुविधा मिली. 2026 में तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार सफलता हासिल कर ली.

एलन करियर इंस्टीट्यूट ने जताई खुशी

एलन करियर इंस्टीट्यूट के निदेशक एवं एलएन माहेश्वरी परमार्थ ट्रस्ट के ट्रस्टी नवीन माहेश्वरी ने कहा कि यह कार्यक्रम विशेष रूप से हिंदी माध्यम और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया था. उन्होंने कहा कि सूरज जैसी सफलता की कहानियां इस पहल की सार्थकता को साबित करती हैं. सूरज सैनी की कहानी यह दिखाती है कि सीमित संसाधन, आर्थिक कठिनाइयां और विपरीत परिस्थितियां भी उस व्यक्ति का रास्ता नहीं रोक सकतीं, जिसके पास मेहनत, धैर्य और अपने सपनों को पूरा करने का मजबूत संकल्प हो.

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Premanshu Chaturvedi
Premanshu Chaturvedihttp://jagoindiajago.news
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