जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच पूरी होने के बाद कई इलाकों में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। हनुमानगढ़ और बिलाड़ा समेत कई जगहों पर नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। वहीं रावतसर में जेल में बंद एक उम्मीदवार के दो नामांकन पत्र भी निरस्त कर दिए गए हैं। नामांकन खारिज होने के बाद अब राजनीतिक दलों के सामने अगली चुनौती अपने बागी उम्मीदवारों को मनाने की है। 3 सितंबर 2026 को नाम वापसी की आखिरी तारीख है।
हनुमानगढ़ में कांग्रेस के 3 प्रत्याशियों के नामांकन खारिज
हनुमानगढ़ नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस के तीन उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज किए गए हैं। इनमें वार्ड 52 से कांग्रेस प्रत्याशी बंशी खन्ना का नाम भी शामिल है। नामांकन निरस्त होने से नाराज कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रिटर्निंग अधिकारी (RO) कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता पक्ष के दबाव में नामांकन खारिज किए गए हैं। पार्टी नेताओं का यह भी आरोप है कि उम्मीदवारों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया।
बिलाड़ा में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हंगामा
जोधपुर जिले के बिलाड़ा नगरपालिका क्षेत्र में भी नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। जानकारी के मुताबिक, वार्ड नंबर 2 से तेजराम और वार्ड नंबर 10 से दुर्गा देवी के नामांकन पत्र खारिज किए गए हैं। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने देर रात तक विरोध जताया। स्थिति को देखते हुए पुलिस को भी हस्तक्षेप करना पड़ा।
रावतसर में जेल में बंद उम्मीदवार के 2 नामांकन कैंसिल
हनुमानगढ़ जिले के रावतसर में एक जेल में बंद उम्मीदवार के दो नामांकन पत्र निरस्त किए गए हैं। नामांकन खारिज होने के बाद यहां भी चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पूरे राजस्थान में हजारों नामांकन खारिज
राज्य निर्वाचन विभाग की ओर से नामांकन पत्रों की जांच के बाद प्रदेशभर में करीब 7,854 नामांकन पत्र खारिज किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में नामांकन दस्तावेज अधूरे होने या निर्धारित समय पर पार्टी का आधिकारिक सिंबल संबंधी प्रपत्र ‘ख’ जमा नहीं करने जैसी वजहों से निरस्त हुए हैं। नामांकन की जांच पूरी होने के बाद अब चुनावी मैदान में बचे उम्मीदवारों की स्थिति और स्पष्ट हो गई है।
भाजपा-कांग्रेस के सामने बागियों को मनाने की चुनौती
नामांकन प्रक्रिया के दौरान टिकट नहीं मिलने से नाराज भाजपा और कांग्रेस के कई नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने निर्दलीय या बागी उम्मीदवार के तौर पर पर्चा दाखिल कर दिया है। अब दोनों प्रमुख दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन बागियों को नाम वापस लेने के लिए मनाना है। पार्टी नेतृत्व ने जिला स्तर पर नेताओं को जिम्मेदारी दी है और कई जगह वरिष्ठ नेता बागी उम्मीदवारों के घर जाकर उनसे बातचीत कर रहे हैं।
3 सितंबर तक नाम वापसी का मौका
निकाय चुनाव में नाम वापसी की अंतिम तारीख 3 सितंबर 2026 निर्धारित है। इस समय सीमा तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकते हैं। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम प्रत्याशियों की सूची सामने आएगी। इसके बाद चुनावी मुकाबले की वास्तविक तस्वीर साफ होगी। अब देखना होगा कि भाजपा और कांग्रेस अपने कितने बागी उम्मीदवारों को मनाकर नामांकन वापस कराने में सफल होती हैं और कितने बागी पार्टी के आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव मैदान में डटे रहते हैं।



