ISSF Junior World Championship 2026 : सुहल। भारत के युवा निशानेबाज प्रीतम केंद्रे ने आईएसएसएफ जूनियर विश्व चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। रविवार को मिली इस सफलता ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की निशानेबाजी प्रतिभा का दम दिखाया। भारत ने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल टीम स्पर्धा में कांस्य पदक भी जीता, जिससे उसके पदकों की कुल संख्या 11 हो गई। इनमें पांच स्वर्ण पदक भी शामिल हैं। अपने दूसरे अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग ले रहे 16 वर्षीय प्रीतम ने आठ खिलाड़ियों के फाइनल में 251.3 का स्कोर बनाकर तटस्थ खिलाड़ी टिमोफेई एलेनिकॉव और नॉर्वे के जेन्स ओस्टली को पीछे छोड़ते हुए भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। पुणे के इस निशानेबाज ने हाल ही में अपनी कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
प्रीतम ने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में गोल्ड जीता
प्रीतम ने कहा, मैं स्वर्ण पदक जीत कर बेहद खुश हूं। प्रतियोगिता के दौरान मेरा पूरा ध्यान अपनी तकनीक और प्रत्येक शॉट में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर था।उन्होंने कहा, विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने से मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। मैं 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में लगातार सुधार करना चाहता हूं और देश के लिए लगातार पदक जीतना चाहता हूं। प्रीतम और उनके साथी पीयूष शर्मा क्वालीफाइंग राउंड में क्रमशः 628.2 और 629.0 का स्कोर बनाकर क्रमशः तीसरे और पांचवें स्थान पर रहते हुए फाइनल में पहुंचे थे।

प्रीतम दूसरी सीरीज के बाद छठे स्थान पर थे, जबकि पीयूष ने बढ़त बना ली थी। प्रीतम ने हालांकि इसके बाद अच्छा प्रदर्शन किया। पीयूष ने भी पदक की उम्मीद बनाए रखी थी लेकिन वह चौथे एलिमिनेशन राउंड के बाद शीर्ष तीन में जगह बनाने से सिर्फ 0.1 अंक से चूक गए और चौथे स्थान पर रहे। प्रीतम ने इसके बाद भी एकाग्रता बनाए रखी और आखिर में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारतीय पुरुष टीम हालांकि रैंकिंग में जगह नहीं बना पाई क्योंकि टीम के तीसरे सदस्य अभिनव साव को अयोग्य घोषित कर दिया गया। उनके उपकरण आईएसएसएफ के मानकों पर खरे नहीं उतरे थे।
भारत ने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल टीम स्पर्धा में अंजलि भागवत, परिशा गुप्ता और निथिला क्रिस्टोफर के संयुक्त प्रयास से कांस्य पदक जीता। इन तीनों ने कुल मिलाकर 1713 अंक बनाए। अंजलि इस स्पर्धा के व्यक्तिगत फाइनल में पहुंचने वाली एकमात्र भारतीय निशानेबाज थीं। उन्होंने 577 के स्कोर के साथ सातवें स्थान पर रहते हुए क्वालीफाई किया। फाइनल में हालांकि वह छठा स्थान ही हासिल कर पाई।



