नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को नई दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय पार्क में आयोजित ‘भजन क्लबिंग’ कार्यक्रम में शामिल हुए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के मौके पर हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा मौजूद थे। पीएम मोदी ने भजन सुने, तालियां बजाईं और खंजरी बजाते हुए भी नजर आए।कार्यक्रम का फॉर्मेट पारंपरिक भजनों और आधुनिक कॉन्सर्ट स्टाइल का मिश्रण था। युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहे ‘भजन क्लबिंग’ में भजन और कीर्तन को लाइव म्यूजिक और कॉन्सर्ट जैसी प्रस्तुति के साथ पेश किया जाता है।
Gen-Z के बीच पहुंच बनाने की कोशिश
पीएम मोदी पहले भी ‘भजन क्लबिंग’ का जिक्र कर चुके हैं। जनवरी 2026 में ‘मन की बात’ में उन्होंने इस ट्रेंड को युवाओं के बीच भक्ति, संस्कृति और आधुनिकता के मेल के तौर पर सराहा था। जुलाई में ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान भी उन्होंने भारत की Gen-Z के बीच इस ट्रेंड का उल्लेख किया था।शुक्रवार का कार्यक्रम ऐसे समय हुआ है जब राजनीतिक दलों की नजर युवा और नए वोटर्स पर है। हाल के दिनों में राहुल गांधी ने भी चुनावी प्रक्रिया और वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। उनके बयानों में युवा वोटर्स के नाम जुड़ने और चुनावी अधिकारों से जुड़े सवाल भी उठे हैं। इन दावों पर चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों की अपनी प्रतिक्रियाएं हैं।
2029 में युवा वोटर्स क्यों अहम होंगे?
भारत में युवा आबादी चुनावी राजनीति के लिए बड़ा वोटर बेस है। चुनाव आयोग के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, 18 से 29 साल के मतदाताओं की हिस्सेदारी 22.78% थी। आने वाले चुनावों में नए मतदाताओं के जुड़ने के साथ युवा वोटर्स का महत्व और बढ़ सकता है।इसी वजह से राजनीतिक दल युवाओं तक पहुंचने के लिए पारंपरिक रैलियों और भाषणों के अलावा सोशल मीडिया, रील्स, डिजिटल कंटेंट और युवा-केंद्रित कार्यक्रमों का इस्तेमाल कर रहे हैं।पीएम मोदी भी युवाओं से जुड़ने के लिए सोशल मीडिया और नए डिजिटल फॉर्मेट का इस्तेमाल करते रहे हैं। ‘GRWM’ जैसे सोशल मीडिया फॉर्मेट से लेकर युवाओं के बीच इस्तेमाल होने वाली भाषा और सोशल मीडिया कंटेंट तक, उनका कम्युनिकेशन पहले की तुलना में ज्यादा डिजिटल-केंद्रित दिखाई देता है।
‘भजन क्लबिंग’ कार्यक्रम इसी कड़ी में एक अलग तरह का उदाहरण रहा, जहां पारंपरिक धार्मिक संगीत को Gen-Z के लोकप्रिय कॉन्सर्ट फॉर्मेट के साथ जोड़ा गया।



