विनेश के जरिए राजनीति चमकाने का खेल देश में कहां तक जायज है- Editorial by Prateek Chauvey

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    भारतीय पहलवान विनेश फोगाट ने पेरिस ओलंपिक के फाइनल मुकाबले से पहले अयोग्य घोषित किए जाने के बाद कुश्ती से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। विनेश ने 6 अगस्त को लगातार तीन मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 50 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती के फाइनल में जगह बनाई थी। ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय महिला बनी, लेकिन उन्हें वजन ज्यादा पाए जाने के चलते ओलंपिक से अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद से सियासत तेज हो गई और विपक्ष लगातार हमलावर है। संसद में विपक्ष ने आवाज उठाई तो मोदी सरकार ने जवाब दिया। इसके बावजूद विनेश फोगाट पर राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही। विनेश ओलंपिक से अयोग्य ऐसे समय करार दी गईं, जब हरियाणा में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तपिश गर्म है। राजनीतिक पार्टियां चुनावी बिसात बिछाने में जुट गईं।
    ऐसे में हरियाणा से आने वाली विनेश फोगाट के ओलंपिक से बाहर होने के मुद्दे को सियासी रंग दिया जाने लगा है। कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने विनेश फोगाट के मामले को लेकर आक्रामक हो गए हैं और पूरे मामले को साजिश करार दे रहे हैं तो वहीं हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी ने सिल्वर मेडल विजेता की तरह विनेश फोगाट का सम्मान करने का ऐलान कर दिया।
    इस तरह सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जिस तरह से शह-मात का खेल इस मुद्दे पर चल रहा है, उसे हरियाणा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। कांग्रेस यह बताने में जुटी है कि विनेश फोगाट को एक साजिश के तहत ओलंपिक से अयोग्य करार दिया गया है और कांग्रेस मोदी सरकार पर सवाल सवाल खड़ा करके भाजपा को कटघरे में खड़ा करने की रणनीति बना रही है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो कांग्रेस विनेश के बहाने हरियाणा विधानसभा चुनाव के सियासी गणित को सेट करने की रणनीति में है। ऐसे में सीएम नायब सैनी ने विनेश फोगाट के सम्मान करने और हरियाणा की बेटी बताकर कांग्रेस की रणनीति को मात देना चाहते हैं। आम आदमी पार्टी के नेता और पंजाब के सीएम भगवंत मान ने विनेश फोगाट के घर पहुंचकर मरहम लगाकर सियासी संदेश देने की कोशिश की। हरियाणा में तीन महीने बाद विधानसभा चुनाव हैं। भाजपा तीसरी बार सत्ता की हैट्रिक लगाने की कोशिश में है तो कांग्रेस वापसी के लिए बेताब है। लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने मनोहर लाल खट्टर को हटाकर प्रदेश अध्यक्ष रहे नायब सिंह सैनी को सीएम बनाने का दांव चला।
    इसके बाद भी लोकसभा चुनाव में 5-5 से कांग्रेस और भाजपा का मुकाबला बराबर का रहा। हालांकि, 2019 में भाजपा ने सभी 10 लोकसभा सीटें जीत कर क्लीन स्वीप किया था, लेकिन पांच सीटें घट जाने के बाद कांग्रेस को उम्मीद दिख रही हैं। सवाल यह है कि एक खिलाड़ी को कब तक राजनीति चमकाने का जरिया बनाया जाएगा? जरूरत राजनीति से ऊपर उठकर विनेश के साथ खड़े होने की है।

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