टोंक। जेल में बंद नरेश मीणा की शनिवार को अचानक तबीयत बिगड़ने से समर्थकों और परिजनों में चिंता बढ़ गई। सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें टोंक जेल से कड़ी सुरक्षा के बीच सआदत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू किया। बाद में चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को देखते हुए जयपुर रेफर कर दिया। सआदत अस्पताल के पीएमओ डॉ. प्रतीक सालोदिया के मुताबिक, नरेश मीणा को सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल लाया गया था। आईसीयू में उनकी निगरानी की गई। प्राथमिक ईसीजी रिपोर्ट सामान्य बताई गई, हालांकि डॉक्टरों ने आगे की जांचों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होने की बात कही।
कई दिनों से सीने में दर्द का दावा
नरेश मीणा के समर्थक और पूर्व सरपंच आरडी गुर्जर ने दावा किया कि उन्हें पिछले 5-6 दिनों से सीने में दर्द की शिकायत थी। उनका आरोप है कि इसके बावजूद समय पर इलाज नहीं कराया गया। आरडी गुर्जर ने सरकार और जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नरेश मीणा के स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही बरती गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
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अस्पताल के बाहर जुटे समर्थक
नरेश मीणा की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आते ही उनके समर्थक सआदत अस्पताल पहुंचने लगे। समर्थकों ने इलाज में कथित देरी को लेकर सवाल उठाए। आरडी गुर्जर के मुताबिक, कुछ दिन पहले पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने भी टोंक जेल में नरेश मीणा से मुलाकात की थी। उस दौरान नरेश मीणा ने सीने में दर्द की शिकायत की थी। समर्थकों का कहना है कि उस समय भी उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्या सामने आई थी।
सुनीता बैंसला ने भी जताई थी चिंता
नरेश मीणा की सेहत को लेकर पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा के अलावा सुनीता बैंसला ने भी सोशल मीडिया मंच एक्स पर चिंता जताई थी। उन्होंने नरेश मीणा के सार्वजनिक मुद्दों को लेकर किए जाने वाले संघर्ष का जिक्र करते हुए उनके स्वास्थ्य पर ध्यान देने और किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने की बात कही थी।
एसडीएम को थप्पड़ मारने के मामले से जुड़ा है केस
नरेश मीणा की गिरफ्तारी का मामला देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान हुए विवाद से जुड़ा है। मतदान के दौरान समरावता गांव के लोगों ने गांव को उनियारा उपखंड में शामिल करने की मांग को लेकर मतदान के बहिष्कार का ऐलान किया था। उस समय निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा भी ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे थे। आरोप है कि जबरन मतदान कराने का विरोध करते हुए नरेश मीणा ने तत्कालीन एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और अदालत के आदेश पर जेल भेज दिया गया। इस मामले में 60 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। बाद में अन्य आरोपियों को जमानत मिल गई, जबकि नरेश मीणा को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। इसके बाद हाईकोर्ट ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ जमानत दी थी।
झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद फिर बढ़ी मुश्किल
25 जुलाई को झालावाड़ के पिपलोदी स्थित सरकारी स्कूल की इमारत का एक हिस्सा गिरने से सात बच्चों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद नरेश मीणा एसआरजी अस्पताल के बाहर प्रदर्शन में पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। नगरफोर्ट थाना पुलिस ने इसे हाईकोर्ट से मिली सशर्त जमानत की शर्तों के उल्लंघन से जोड़ते हुए उनकी जमानत रद्द करने की मांग की। अदालत के फैसले के बाद नरेश मीणा ने 6 अगस्त को नगरफोर्ट थाने में सरेंडर किया। इसके बाद उन्हें एससी-एसटी अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें टोंक जेल भेज दिया गया।
अब जयपुर में होगा इलाज
फिलहाल नरेश मीणा को टोंक के सआदत अस्पताल से जयपुर रेफर किया गया है। प्राथमिक ईसीजी सामान्य आने के बावजूद सीने में दर्द की शिकायत को देखते हुए चिकित्सकीय निगरानी और आगे की जांच जरूरी मानी गई है। नरेश मीणा की तबीयत की खबर सामने आने के बाद उनके समर्थकों में चिंता बढ़ गई है। वहीं, जेल प्रशासन और सरकार पर लगाए जा रहे इलाज में लापरवाही के आरोपों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।



