(प्रज्ञा पांडे)।आज के समय में सुपरमार्केट की अलमारियां ऐसे उत्पादों से भरी हुई हैं जो देखने में बेहद आकर्षक लगते हैं। रंगीन पैकेट, बड़े-बड़े स्वास्थ्य दावे और विज्ञापन हमें यह विश्वास दिलाते हैं कि हम कुछ अच्छा खरीद रहे हैं। लेकिन असली तस्वीर कई बार पैकेट के पीछे लिखी सामग्री सूची में छिपी होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हर प्रोसेस्ड फूड खराब नहीं होता, लेकिन जिन खाद्य पदार्थों में बहुत ज्यादा औद्योगिक प्रक्रिया, अतिरिक्त चीनी, अधिक नमक, अस्वास्थ्यकर वसा और कई तरह के एडिटिव्स होते हैं, उन्हें सीमित मात्रा में खाना बेहतर माना जाता है।
- पैकेज्ड फ्रूट जूस: बहुत से लोग मानते हैं कि एक गिलास पैकेट वाला जूस पीना फल खाने के बराबर है या फल से बेहतर है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार पूरा फल और जूस एक जैसे नहीं होते। जब फल का जूस बनाया जाता है तो उसमें मौजूद फाइबर की मात्रा खत्म हो जाती है। फाइबर शरीर में शुगर के अवशोषण को धीमा करने में मदद करता है। इसके अलावा कई पैकेज्ड जूस में अतिरिक्त चीनी, प्रेसेर्वटिव्ज़, रंग और पानी होता है। पैकेज्ड जूस में रियल फ्रूट पल्प की मात्रा सिर्फ 10 से 40% ही होती है और इसमें न्यूट्रिएंट्स की मात्रा फल के मुताबिक काफी कम होती है।
बेहतर विकल्प: पूरा फल खाएं, इससे फाइबर भी मिलेगा और पेट लंबे समय तक भरा महसूस होगा। अगर जूस लेना हो तो घर का बना बिना चीनी वाला जूस सीमित मात्रा में लें।
- फ्लेवर्ड योगर्ट: दही को स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है क्योंकि इसमें प्रोटीन और कुछ प्रकार के लाभकारी बैक्टीरिया होते हैं। लेकिन बाजार में मिलने वाले कई फ्लेवर्ड योगर्ट में स्वाद बढ़ाने के लिए काफी मात्रा में चीनी, एडिटिव्स और फ्लेवरिंग एजेंट्स मिलाए जाते है। लोग अक्सर “फ्रूट योगर्ट” को फल वाला स्वस्थ विकल्प समझ लेते हैं, जबकि कई उत्पादों में असली फल की मात्रा कम और मीठे फ्लेवर ज्यादा हो सकते हैं।
बेहतर विकल्प: सादा घर का जमा हुआ दही लें और उसमें ताजे फल, बीज या थोड़े ड्राई फ्रूट्स मिलाकर खा सकते है।
- हेल्थ बार और ग्रेनोला: एनर्जी बार, प्रोटीन बार और ग्रेनोला बार को अक्सर जिम और फिटनेस से जोड़ा जाता है। लेकिन हर बार स्वास्थ्यवर्धक नहीं होता कुछ उत्पादों में शुगर सिरप, चॉकलेट कोटिंग और अधिक कैलोरी हो सकती है। सिर्फ “हेल्थ” लिखा होना किसी उत्पाद को अपने आप स्वस्थ नहीं बनाता।
बेहतर विकल्प: बादाम, अखरोट, मूंगफली, बीज या घर में बनाया गया कम चीनी वाला स्नैक बेहतर विकल्प हो सकता है।
- ब्रेकफास्ट सीरियल: कई परिवारों में नाश्ते के लिए पैकेट वाले सीरियल का इस्तेमाल बढ़ गया है। विज्ञापनों में इन्हें ऊर्जा और बच्चों के विकास से जोड़कर दिखाया जाता है। लेकिन कई मीठे सीरियल में अतिरिक्त चीनी, मैदा और फ्लेवरिंग एजेंट्स की मात्रा अधिक होती है, और इनमें फाइबर की मात्रा कम हो सकती है।
बेहतर विकल्प: दलिया, ओट्स, पोहा, उपमा, अंडा, दाल-आधारित नाश्ता या साबुत अनाज वाले विकल्प चुन सकते हैं।
- एनर्जी ड्रिंक: एनर्जी ड्रिंक युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं क्योंकि इन्हें तुरंत ऊर्जा देने वाला बताया जाता है। लेकिन इनमें अक्सर ज्यादा कैफीन और चीनी होती है। इनका अधिक सेवन नींद की समस्या, दिल की धड़कन बढ़ने और रक्तचाप जैसी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है, खासकर उन लोगों में जो ज्यादा मात्रा में सेवन करते हैं।
बेहतर विकल्प: पर्याप्त पानी पिएं, अच्छी नींद लें और जरूरत हो तो सीमित मात्रा में चाय या कॉफी का सेवन करें।
- प्रोसेस्ड मीट: सॉसेज, हॉट डॉग और कुछ अन्य प्रोसेस्ड मीट को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए कई प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने प्रोसेस्ड मीट के सेवन को कुछ प्रकार के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा है। इसका मतलब यह नहीं कि कभी-कभी सेवन से तुरंत नुकसान होगा, लेकिन इसे रोज के भोजन का हिस्सा बनाना बेहतर नहीं माना जाता।
बेहतर विकल्प: ताजा मांस, मछली, अंडे, दालें और बीन्स जैसे कम प्रोसेस्ड प्रोटीन स्रोत चुनें।
- इंस्टेंट नूडल्स और रेडी-टू-ईट भोजन: भागदौड़ भरी जिंदगी में इंस्टेंट भोजन आसान विकल्प लगता है। लेकिन कई रेडी-टू-ईट उत्पादों में नमक ज्यादा और फाइबर कम हो सकता है। ऐसे भोजन का कभी-कभी सेवन अलग बात है, लेकिन रोजाना इन्हें खाने की आदत संतुलित आहार को प्रभावित कर सकती है।
बेहतर विकल्प: घर पर जल्दी बनने वाले विकल्प जैसे पोहा, उपमा, दाल-चावल, सब्जियों वाला भोजन बेहतर हो सकता है।
- लो-फैट फूड: जब किसी उत्पाद पर “लो फैट” लिखा होता है तो लोग उसे तुरंत बेहतर विकल्प मान लेते हैं। लेकिन कई बार स्वाद बनाए रखने के लिए इनमें अतिरिक्त चीनी या अन्य सामग्री मिलाई जा सकती है।
बेहतर विकल्प: सिर्फ एक पोषक तत्व देखने के बजाय पूरे लेबल को देखें। प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाली स्वस्थ वसा जैसे मेवे और बीज उपयोगी हो सकते हैं।
- पैकेट वाले स्नैक्स: चिप्स, नमकीन और फ्लेवर्ड स्नैक्स आसानी से मिल जाते हैं और स्वाद के कारण लोग इन्हें बार-बार खाते हैं। लेकिन इनमें अक्सर कैलोरी, नमक और रिफाइंड तेल की मात्रा ज्यादा होती है।
बेहतर विकल्प: भुना चना, मखाना, बिना नमक वाले मेवे या घर के बने स्नैक्स चुनें।
- “नेचुरल” लिखे उत्पादों से भी रहें सावधान: आजकल “नेचुरल”, “ऑर्गेनिक” और “इम्युनिटी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल बहुत ज्यादा होता है। लेकिन कोई उत्पाद प्राकृतिक होने से अपने आप स्वस्थ नहीं बन जाता। उदाहरण के लिए शहद और गुड़ प्राकृतिक जरूर हैं, लेकिन इनमें भी शर्करा होती है और इन्हें सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए।
बेहतर विकल्प: खाने की गुणवत्ता, मात्रा और पूरी सामग्री पर ध्यान दें, सिर्फ मार्केटिंग शब्दों पर नहीं।
लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए क्या खाएं?
ताजे फल और सब्जियां
दालें, चना, राजमा और बीन्स
साबुत अनाज जैसे बाजरा, ज्वार और ओट्स
मेवे और बीज
पर्याप्त प्रोटीन
घर का बना कम-प्रोसेस्ड भोजन
सबसे आसान नियम: पैकेट की जगह प्रकृति चुनें
स्वस्थ रहने के लिए हर चीज को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है। असली बदलाव रोज की आदतों से आता है। खरीदारी करते समय एक छोटा नियम याद रखें जिस भोजन की सामग्री सूची बहुत लंबी हो और जिसमें कई ऐसी चीजें हों जिन्हें आप पहचान नहीं सकते, उसे रोज खाने से बचना बेहतर है। कम प्रोसेस्ड भोजन, संतुलित डाइट, नियमित व्यायाम और अच्छी नींद मिलकर लंबे और स्वस्थ जीवन की नींव बनाते हैं।



