Friday, July 24, 2026
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अलवर में पति ने तीसरे बेटे के रंग पर उठाए सवाल, दिया पत्नी को 3 तलाक!

राजस्थान के अलवर में एक महिला ने पति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि तीसरे बेटे के सांवले रंग को लेकर पति लगातार शक करता था और उसे परेशान करता था। विवाद बढ़ने के बाद पति ने कथित तौर पर तीन तलाक देकर 12 साल की शादी खत्म कर दी।

अलवर, राजस्थान (प्रज्ञा पांडे)। राजस्थान के अलवर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने रिश्तों और सोच पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला ने अपने पति पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की है कि उसके तीसरे बेटे के सांवले रंग को लेकर पति उससे विवाद करता था और आखिरकार इसी बात पर उसे तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया। महिला का कहना है कि पति पिछले कई वर्षों से बच्चे के रंग को लेकर उसे परेशान कर रहा था। वह बार-बार सवाल करता था कि पहले दो बच्चों का रंग गोरा है, लेकिन तीसरे बच्चे का रंग सांवला कैसे हो गया। इसी शक को लेकर घर में अक्सर झगड़े होते थे।

महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि उसका निकाह करीब 12 साल पहले हुआ था। शादी के बाद उसके तीन बेटे हुए। महिला के मुताबिक, उसके बड़े बेटे की उम्र करीब 11 साल और दूसरे बेटे की उम्र करीब 9 साल है, जबकि तीसरा बेटा करीब 6 साल का है। महिला का आरोप है कि पति तीसरे बेटे को अपना बच्चा मानने से इनकार करता था। वह बच्चे के रंग को लेकर उस पर शक करता था और इसी वजह से दोनों के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था। शिकायत में महिला ने आरोप लगाया कि तीसरे बेटे के जन्म के बाद से ही पति का व्यवहार बदल गया था। उसका कहना है कि पिछले करीब छह साल से पति बच्चे के रंग को लेकर विवाद करता था और कई बार उसके साथ मारपीट भी की।

महिला के अनुसार, उसने परिवार बचाने की कोशिश की, लेकिन विवाद खत्म नहीं हुआ। आखिरकार मामला इतना बढ़ गया कि पति-पत्नी के बीच बड़ा झगड़ा हो गया। महिला ने पुलिस को बताया कि 15 जुलाई को भी पति-पत्नी के बीच इसी मुद्दे को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि इसी दौरान पति ने गुस्से में तीन बार “तलाक” बोल दिया और उसे घर से बाहर निकाल दिया। महिला ने बताया कि पति के तलाक देने के बाद उसने परिवार वालों से सलाह ली और फिर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।

इस मामले में फिलहाल महिला की शिकायत सामने आई है। पुलिस जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि पूरे घटनाक्रम में क्या-क्या तथ्य सही हैं और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि बच्चों के रंग को लेकर समाज में मौजूदा सोच किस तरह परिवारों में विवाद की वजह बन सकती है।

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