लंदन। भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को एक विदेशी अदालत से बड़ा कानूनी झटका लगा है। अदालत ने एक सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय बैंक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नीरव मोदी को 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि चुकाने का निर्देश दिया है। यह फैसला बैंक द्वारा दायर की गई ऋण वसूली से जुड़ी कानूनी कार्रवाई के तहत आया है।
मामला नीरव मोदी समूह की एक विदेशी कंपनी को दिए गए कर्ज और उससे संबंधित व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा हुआ था। बैंक का आरोप था कि कंपनी द्वारा लिए गए ऋण का भुगतान नहीं किया गया, जिसके बाद वसूली के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया। सुनवाई के दौरान बैंक ने दावा किया कि कारोबारी व्यक्तिगत रूप से भी इस वित्तीय दायित्व के लिए जिम्मेदार हैं।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया और माना कि बकाया राशि की अदायगी के लिए नीरव मोदी उत्तरदायी हैं। आदेश के तहत मूल राशि के साथ ब्याज और अन्य देयताओं को भी शामिल किया गया है, जिससे कुल रकम 100 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई है। इस फैसले को भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशों में लंबित वित्तीय मामलों में इस तरह के निर्णय बैंकों की वसूली प्रक्रिया को मजबूती प्रदान करते हैं। साथ ही इससे उन मामलों में भी सकारात्मक संदेश जाता है, जहां आर्थिक अपराधों के आरोपित देश से बाहर रहकर कानूनी चुनौतियां पेश कर रहे हैं। नीरव मोदी पहले से ही भारत में कई वित्तीय अनियमितताओं और बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामलों का सामना कर रहे हैं। उनके खिलाफ विभिन्न जांच एजेंसियां कार्रवाई कर चुकी हैं और उनसे जुड़ी संपत्तियों की जब्ती तथा वसूली की प्रक्रिया भी जारी है।
ताजा फैसले के बाद माना जा रहा है कि संबंधित बैंक को अपनी बकाया राशि की वसूली में मदद मिलेगी। वहीं यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में कानूनी सहयोग और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



