Kirodi Lal Meena: कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा शुक्रवार को अचानक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) मुख्यालय पहुंच गए. उन्होंने हाल ही में बीज निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक जुगल किशोर और कृषि विभाग के कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी के मामले में खुलकर अपनी बात रखी. मंत्री ने कहा कि यदि मैं जांच में दोषी हूं तो मुझे तत्काल गिरफ्तार किया जाए, लेकिन यदि वे निर्दोष हैं तो ACB को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.
आखिर कौन है वो डॉक्टर और मंत्री ?
ACB मुख्यालय पहुंचने के बाद किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि 8 जून को दर्ज एफआईआर में डॉक्टर और मंत्री का उल्लेख किया गया है.उन्होंने कहा कि वे स्वयं डॉक्टर भी हैं और मंत्री भी, ऐसे में जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है. उन्होंने ACB से पूछा कि आखिर FIR में जिस डॉक्टर और मंत्री का जिक्र किया गया है, वह कौन है.
‘अगर मेरा नाम FIR में, तो गिरफ्तार किया जाए’
मंत्री ने कहा कि विपक्षी नेता, खासकर पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा, उन पर आरोप लगा रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि FIR में उल्लेखित व्यक्ति वे हैं तो एजेंसी उन्हें गिरफ्तार करे. उन्होंने कहा कि भविष्य में यह आरोप नहीं लगना चाहिए कि सत्ता में होने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई.
ACB पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप
किरोड़ी लाल मीणा ने ACB पर राजनीतिक दबाव में काम करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि एजेंसी उन्हें बदनाम करने का प्रयास कर रही है. मंत्री ने आरोप लगाया कि जिस तरह की खबरें और सूचनाएं सार्वजनिक हुई हैं, उससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है. उन्होंने ACB को निष्पक्षता बनाए रखने और अपनी सीमाओं का ध्यान रखने की नसीहत भी दी.
स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन घोटाले का मुद्दा उठाया
इस दौरान मंत्री ने राजस्थान स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन में कथित घोटाले का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि निगम के अध्यक्ष द्वारा जांच की मांग को लेकर ACB को 7 पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बावजूद केवल प्रारंभिक जांच ही चल रही है. उन्होंने एजेंसी से सवाल किया कि ऐसे मामलों में कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है.
मंडरायल पंचायत में गबन का मामला उठाया
किरोड़ी लाल मीणा ने करौली जिले की मंडरायल पंचायत के कथित भ्रष्टाचार का भी जिक्र किया. उन्होंने दावा किया कि पिछले शासनकाल में स्वीकृत 28 करोड़ रुपये के विकास कार्यों में से करीब 26 करोड़ रुपये का गबन हुआ, लेकिन अब तक FIR तक दर्ज नहीं की गई है. मंत्री ने कहा कि वे ACB की कार्यप्रणाली और कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाने के लिए मुख्यालय पहुंचे हैं.
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