भीलवाड़ा। री-NEET परीक्षा से पहले फर्जी पेपर बेचने वाले आरोपी को अदालत ने 22 जून तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है. पूछताछ में फर्जी पेपर रैकेट से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं. पुलिस ने गुरुवार देर रात शहर के पटेल नगर क्षेत्र से 19 वर्षीय आकाश चौधरी को गिरफ्तार किया था. आरोपी जयपुर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था और हाल ही में वह भीलवाड़ा लौटा था. जांच में सामने आया कि उसने टेलीग्राम पर ‘पेपर माफिया’ नाम से एक चैनल बना रखा था, जिससे 52 सदस्य जुड़े हुए थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सागर राणा ने जांच की जिम्मेदारी सीओ सदर नेमीचंद चौधरी को सौंपी है.
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी री-NEET परीक्षा का कथित प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा कर अभ्यर्थियों से प्रति पेपर 4 हजार रुपये वसूल रहा था। भुगतान के लिए वह अभ्यर्थियों को क्यूआर कोड भेजता था और राशि सीधे अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करवाता था. पुलिस ने उसके कब्जे से मोबाइल फोन, नीट की किताबें और कई अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं.
एस-मेक पोर्टल से मिली थी संदिग्ध गतिविधि की सूचना
प्रताप नगर थाना प्रभारी सुनील ताड़ा के अनुसार, भारत सरकार के एस-मेक पोर्टल के माध्यम से एसपी कार्यालय की विशेष शाखा को सोशल मीडिया पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी. साथ ही जिला विशेष टीम (DST) को भी इनपुट मिला था कि पटेल नगर क्षेत्र में रहने वाला एक युवक ऑनलाइन फर्जी पेपर बेचने का काम कर रहा है. सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया गया.
पहचान छिपाने के लिए प्रॉक्सी नेटवर्क का कर रहा था इस्तेमाल
जांच के दौरान यह भी पता चला कि आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए अमेरिका आधारित वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) और प्रॉक्सी नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा था. इन्हीं माध्यमों से वह टेलीग्राम चैनल संचालित कर अभ्यर्थियों से संपर्क करता था. पुलिस के अनुसार, आरोपी नीट की किताबों के पन्नों को स्कैन कर डमी प्रश्नपत्र तैयार करता था और उन्हें असली पेपर बताकर बेचने की कोशिश करता था.
गिरोह में शामिल लोगों का पता लगाने में जुटी पुलिस
फिलहाल पुलिस बैंक खातों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अब तक कितने अभ्यर्थियों से रकम वसूली गई और कुल कितनी राशि आरोपी के खाते में जमा हुई. इसके अलावा टेलीग्राम चैनल से जुड़े 52 सदस्यों की भी जांच की जा रही है. पुलिस का मानना है कि रिमांड के दौरान इस पूरे नेटवर्क और संभावित सहयोगियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है.
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