जयपुर: कलयुग के अवतारी, शीश के दानी बाबा श्याम के भक्तों की संख्या आज दुनिया के कोने-कोने में दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। कहते हैं कि जिसकी अर्जी कहीं नहीं सुनी जाती, उसकी सुनवाई खाटू के इस पावन दरबार में होती है। तभी तो लाखों भक्त एक ही जयकारा लगाते हैं— ‘हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा’।
मोरछड़ी वाले को प्रिय है यह खास सेवा
‘जागो इंडिया जागो न्यूज़ चैनल’ की इस विशेष प्रस्तुति में हम बात कर रहे हैं बाबा को सबसे प्रिय चीज—इत्र के बारे में। शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार, बाबा श्याम को सुगंध बहुत प्रिय है। लेकिन हर सुगंध उन्हें पसंद आए, यह जरूरी नहीं। बाबा श्याम को गुलाब (Rose) और केसर (Saffron) का इत्र सबसे ज्यादा प्रिय है। गुलाब प्रेम का प्रतीक है और केसर शुद्धता का। जब आप ये इत्र अर्पित करते हैं, तो दरबार में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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भूलकर भी न करें यह गलती
अक्सर भक्त इत्र की शीशी लेकर सीधे विग्रह (मूर्ति) पर उड़ेल देते हैं, जो कि धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। बाबा को इत्र अर्पित करने की सही विधि इस प्रकार है:
- रुई का प्रयोग: हमेशा इत्र को रुई के फाहे (Cotton swab) में लगाकर बाबा को अर्पित करें।
- जोड़े का नियम: बाबा को इत्र हमेशा जोड़े में (In Pairs) चढ़ाएं। यानी एक नहीं, बल्कि दो शीशियां अर्पित करें—एक चरणों में और दूसरी विग्रह के समीप।
- मनोकामना का स्मरण: इत्र चढ़ाते समय मन ही मन अपनी इच्छा को बाबा के सामने दोहराएं।
विशेष मनोकामना के लिए ‘अर्जी’ उपाय
अगर आपकी कोई विशेष मनोकामना लंबे समय से पूरी नहीं हो रही है, तो इत्र के साथ यह उपाय जरूर करें:
- एक कोरा कागज लें और लाल पेन से अपनी अर्जी लिखें।
- इस कागज को एक नारियल के साथ रखकर मौली (कलावा) से बांध दें।
- इसे बाबा के चरणों में अर्पित कर दें। मान्यता है कि इत्र की खुशबू और आपकी सच्ची अर्जी मिलकर बाबा का आशीर्वाद दिलाती है।
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घर लाएं इत्र का प्रसाद
इत्र चढ़ाने के बाद संभव हो तो एक शीशी या उसका कुछ हिस्सा प्रसाद के रूप में घर वापस लाएं। इसे अपने घर के मंदिर या तिजोरी में रखने से नकारात्मकता दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है। यदि आप खाटू नहीं जा सकते, तो घर पर ही बाबा की तस्वीर के सामने रुई में इत्र लगाकर यह विधि कर सकते हैं। बाबा श्याम तो केवल भाव के भूखे हैं। चाहे आप एक फूल चढ़ाएं या इत्र, अगर मन में सच्चा विश्वास है, तो वो आपकी झोली जरूर भरेंगे।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य धार्मिक मान्यताओं और लोक कथाओं पर आधारित है। ‘जागो इंडिया जागो’ इसकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं करता है।



