Saturday, May 30, 2026
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जवान रहने के लिए पुतिन का बड़ा प्लान, रूस का 26 अरब डॉलर मेडिकल प्रोजेक्ट, बेटी और साइंटिस्ट मिलकर कर रहे काम

रूस ने 26 अरब डॉलर का “न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज” कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य उम्र बढ़ाने और अंग प्रत्यारोपण तकनीक विकसित करना है। इसमें बायोप्रिंटिंग, जीन-संशोधित अंग विकास और जीन थेरेपी पर काम हो रहा है। पुतिन-शी बातचीत में लंबी उम्र पर चर्चा हुई, लेकिन परियोजना पर वैज्ञानिकों ने सवाल उठाए हैं।

Russia Biotech 26 Billion Dollar Plan : नई दिल्ली/मास्को। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) लंबे समय से अपनी मजबूत और फिट छवि के लिए जाने जाते हैं। कभी घुड़सवारी करते हुए, कभी आइस हॉकी खेलते हुए और कई बार शर्टलेस तस्वीरों के जरिए उन्होंने खुद को एक ऊर्जावान और ताकतवर नेता के रूप में पेश किया है। लेकिन अब सामने आई एक रिपोर्ट इस छवि से आगे की एक नई कहानी बयां करती है।

अमेरिकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने वर्ष 2024 में “न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज” नाम से एक बड़ा और महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया है, जिसका बजट करीब 26 अरब डॉलर बताया जा रहा है। इस प्रोग्राम का उद्देश्य ऐसी उन्नत चिकित्सा और जैव-तकनीक विकसित करना है, जो इंसानों की उम्र को बढ़ाने के साथ-साथ शरीर के खराब या कमजोर हो चुके अंगों को बदलने में मदद कर सके।

पुतिन-शी बातचीत में अमरता और लंबी उम्र चर्चा

पिछले वर्ष चीन में आयोजित एक सैन्य परेड के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) के बीच हुई बातचीत ने वैश्विक स्तर पर एक अलग ही बहस को जन्म दे दिया था। इस मुलाकात के दौरान पुतिन ने मानव जीवन और चिकित्सा विज्ञान के भविष्य को लेकर एक बेहद दूरगामी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि लगातार अंग प्रत्यारोपण (organ transplantation) की प्रक्रिया के जरिए इंसान न सिर्फ अपनी उम्र को बढ़ा सकता है, बल्कि संभव है कि वह युवा बना रहे और कुछ हद तक “अमरता” की दिशा में भी आगे बढ़ सके। इस पर शी जिनपिंग ने भी भविष्य की संभावनाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण अनुमान साझा किया था। उन्होंने कहा था कि वैज्ञानिक प्रगति की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए सदी के अंत तक इंसानों की औसत आयु 150 वर्ष तक पहुंच सकती है।

रूस का लक्ष्य 2030 ट्रांसप्लांट क्रांति

रूस में चल रहे महत्वाकांक्षी “न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज” प्रोजेक्ट के तहत वैज्ञानिक दो प्रमुख उन्नत तकनीकों पर सबसे अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिनका उद्देश्य भविष्य में मानव अंग प्रत्यारोपण और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित करना है। पहली तकनीक है बायोप्रिंटिंग, जिसमें 3डी प्रिंटर की मदद से जीवित ऊतकों और अंगों का निर्माण किया जा रहा है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस तकनीक के जरिए मानव कार्टिलेज जैसी संरचनाओं के साथ-साथ चूहे की थायरॉयड ग्रंथि जैसी जैविक इकाइयों को सफलतापूर्वक विकसित किया जा चुका है। यह तकनीक भविष्य में जटिल अंगों के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

दूसरी महत्वपूर्ण दिशा है जीन-संशोधित मिनी-पिग्स (genetically modified mini-pigs) के भीतर मानव अंग विकसित करना। इस प्रक्रिया का उद्देश्य ऐसे जीवित अंग तैयार करना है, जिन्हें जरूरत पड़ने पर सीधे मानव शरीर में प्रत्यारोपित किया जा सके। इसे भविष्य की ट्रांसप्लांट तकनीक के लिए एक संभावित क्रांतिकारी समाधान माना जा रहा है। रूसी सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक मानव अंगों का व्यावहारिक और बड़े पैमाने पर ट्रांसप्लांटेशन संभव हो सके। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए, हाल ही में एक नई जीन थेरेपी पर भी काम शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करना और मानव जीवन को लंबा करना बताया जा रहा है।

रिसर्च प्रोग्राम की देखरेख कर रही पुतिन की बेटी

रूस के महत्वाकांक्षी “न्यू हेल्थ प्रिजर्वेशन टेक्नोलॉजीज” कार्यक्रम को दो ऐसे प्रमुख चेहरों का नेतृत्व प्राप्त है, जिन्हें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बेहद करीबी माना जाता है। इस परियोजना से जुड़ी प्रमुख हस्तियों में उनकी बेटी मारिया वोरोंतसोवा (Maria Vorontsova) शामिल हैं, जो एंडोक्रिनोलॉजी और मेडिकल रिसर्च से जुड़े सरकारी कार्यक्रमों की निगरानी कर रही हैं। इसके अलावा, इस पूरे दीर्घायु (longevity) मिशन के एक अन्य महत्वपूर्ण चेहरा मिखाइल कोवाल्चुक माने जाते हैं, जिन्हें इस रणनीति का प्रमुख वास्तुकार बताया जाता है।

हालांकि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में कई सवाल भी उठ रहे हैं। रूस छोड़ चुके वैज्ञानिक एलेक्जेंडर ओस्त्रोवस्की का कहना है कि यदि इन दावों से जुड़ी ठोस वैज्ञानिक रिसर्च और प्रकाशित परिणाम सार्वजनिक नहीं किए जाते, तो इन्हें वास्तविक उपलब्धि की बजाय केवल महत्वाकांक्षी कल्पनाएं ही माना जाएगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि कई वैज्ञानिक संस्थानों में फंडिंग हासिल करने के लिए कुछ शोधकर्ता ऐसी रिपोर्टें प्रस्तुत कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर सत्ता और नेतृत्व को पसंद आने वाले निष्कर्षों के अनुरूप होती हैं।


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Mukesh Kumar
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