Naga Chaitanya Personality Rights Case : मुंबई। साउथ फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय अभिनेता नागा चैतन्य (Naga Chaitanya) ने अपने ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ (व्यक्तित्व अधिकारों) की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अभिनेता ने विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उनके नाम, तस्वीर और चेहरे का कथित तौर पर बिना अनुमति इस्तेमाल किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई है।
याचिका में नागा चैतन्य ने विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए कंटेंट, उनकी पहचान का उपयोग कर बेचे जा रहे अनधिकृत उत्पादों और इंटरनेट पर प्रसारित कथित अश्लील सामग्री को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि उनकी अनुमति के बिना उनकी छवि और पहचान का व्यावसायिक एवं अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, अभिनेता ने उन ऑनलाइन सामग्रियों पर भी आपत्ति दर्ज कराई है, जिनमें यह संकेत देने की कोशिश की गई है कि उन्होंने अपनी पूर्व पत्नी सामंथा रुथ प्रभु (Samantha Ruth Prabhu) के साथ रिश्ते में बेवफाई की थी। नागा चैतन्य का कहना है कि इस तरह के दावे उनकी छवि को नुकसान पहुंचाते हैं और तथ्यों से परे भ्रामक जानकारी फैलाते हैं।

नागा चैतन्य ने लगाए ये गंभीर आरोप
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नागा चैतन्य ने अपनी याचिका में अदालत से मांग की है कि किसी भी तीसरे पक्ष को उनकी स्पष्ट अनुमति के बिना उनके नाम, तस्वीर, चेहरे या व्यक्तित्व का इस्तेमाल करने से रोका जाए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कई वेबसाइटें और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अभिनेता की लोकप्रियता का कथित तौर पर अनुचित लाभ उठा रहे हैं।
दावा किया गया है कि उनकी पहचान का इस्तेमाल व्यावसायिक फायदे के लिए किया जा रहा है, जबकि कुछ प्लेटफॉर्म आपत्तिजनक और भ्रामक सामग्री प्रकाशित कर दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने तथा ट्रैफिक बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अभिनेता का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां न केवल उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन करती हैं, बल्कि उनकी पेशेवर छवि और प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसी वजह से उन्होंने अदालत से हस्तक्षेप कर ऐसे कथित दुरुपयोग पर रोक लगाने की मांग की है।
AI-जनरेटेड और अश्लील कंटेंट पर अदालत में उठाया मुद्दा
इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान नागा चैतन्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वैभव गग्गर ने अदालत को बताया कि कई वेबसाइटें और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म यूजर्स का ध्यान आकर्षित करने तथा ट्रैफिक बढ़ाने के लिए अभिनेता के नाम के साथ अश्लील और भ्रामक सर्च टर्म्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।
वकील ने दलील दी कि इस तरह का कंटेंट न केवल नागा चैतन्य की पहचान और व्यक्तित्व अधिकारों का कथित दुरुपयोग करता है, बल्कि उनकी सार्वजनिक छवि और प्रतिष्ठा को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि इंटरनेट पर AI-जनरेटेड सामग्री के जरिए अभिनेता की पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे गलत और भ्रामक जानकारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने भी सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की स्थिति पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक हस्तियों को जिस स्तर की जांच-परख और आलोचना का सामना करना पड़ता है, वह कई बार निराशाजनक होता है। जज ने कहा, आप सार्वजनिक जीवन में हैं, इसलिए स्वाभाविक रूप से आम लोगों की तुलना में अधिक जांच-परख का सामना करते हैं, लेकिन इसकी भी एक सीमा होनी चाहिए।

सामंथा संग रिश्ते को लेकर कंटेंट पर भी जताई आपत्ति
अपनी पहचान और छवि के कथित दुरुपयोग के अलावा, नागा चैतन्य की कानूनी टीम ने उनकी निजी जिंदगी से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट पर भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। खासतौर पर उनकी पूर्व पत्नी सामंथा रुथ प्रभु के साथ रिश्ते और तलाक से जुड़े कथित भ्रामक दावों को लेकर अदालत का ध्यान आकर्षित किया गया।वकीलों का दावा है कि कई ऑनलाइन पोस्ट, वीडियो और सोशल मीडिया सामग्री में नागा चैतन्य को ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश किया गया है, जिसने कथित तौर पर सामंथा को धोखा दिया और उनके करियर को नुकसान पहुंचाने में भूमिका निभाई। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि इस तरह के आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और अभिनेता की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
सुनवाई के दौरान नागा चैतन्य की ओर से पेश अधिवक्ता वैभव गग्गर ने अदालत में दलील दी कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या निष्पक्ष आलोचना का मामला नहीं है, बल्कि सुनियोजित ट्रोलिंग और चरित्र हनन का उदाहरण है। उन्होंने कहा, “यह ट्रोलिंग है, यह निष्पक्ष आलोचना नहीं है।” फिलहाल, दिल्ली हाई कोर्ट अभिनेता की याचिका पर विचार कर रहा है और यह तय करेगा कि उनके ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ यानी व्यक्तित्व अधिकारों के कथित अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ उन्हें किस प्रकार की कानूनी सुरक्षा प्रदान की जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को निर्धारित की गई है।



