Operation Sindoor 2.0: राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड के मौके पर थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि भारतीय सशस्त्र बल किसी भी संभावित चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो सेना ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ को अंजाम देने में सक्षम है और इसके लिए तीनों सेनाएं संयुक्त रूप से तैयारी कर रही हैं.
‘फिलहाल शत्रुता में अस्थायी विराम है’
पुणे स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में आयोजित पासिंग आउट परेड के बाद मीडिया से बातचीत में जनरल द्विवेदी ने कहा कि फिलहाल शत्रुता में अस्थायी विराम है, लेकिन सुरक्षा चुनौतियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना भविष्य की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए समन्वित रणनीति के साथ काम कर रही हैं.
‘ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी’
सेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं माना जा सकता. उन्होंने कहा, ‘जहां तक ऑपरेशन सिंदूर का सवाल है, यह अब भी जारी है. फिलहाल शत्रुता में अस्थायी विराम है. इसलिए भारतीय सेना और तीनों सेनाएं ऑपरेशन सिंदूर 2.0 की संभावित आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए पूरी तैयारी कर रही हैं.’
#WATCH | Maharashtra | Indian Army Chief General Upendra Dwivedi says, "Operation Sindoor is still continuing. There is a temporary cessation of hostilities. The Indian Army and all three services are preparing well for Operation Sindoor 2.0, if it takes place. Presently, we are… pic.twitter.com/3lEc8uXA5N
— ANI (@ANI) May 30, 2026
गौरतलब है कि भारत ने मई 2025 में पाकिस्तान स्थित आतंकी ढांचे को निशाना बनाते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था. यह कार्रवाई अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमला के जवाब में की गई थी, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी. इस ऑपरेशन के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था.
युद्ध की बदलती प्रकृति पर की बात
जनरल द्विवेदी ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति पर भी विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध केवल थल, जल और वायु तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अंतरिक्ष, साइबर और संज्ञानात्मक (कॉग्निटिव) युद्ध जैसे नए आयाम भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे. उनके अनुसार, इन क्षेत्रों में बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और तकनीकी क्षमता विकसित करना समय की मांग है.
‘आधुनिक युद्धक्षेत्र पहले की तुलना में कहीं अधिक पारदर्शी’
सेना प्रमुख ने कहा कि आधुनिक युद्धक्षेत्र पहले की तुलना में कहीं अधिक पारदर्शी हो चुके हैं. निगरानी तकनीकों और रियल-टाइम इंटेलिजेंस के कारण लगभग हर गतिविधि पर नजर रखी जा सकती है. ऐसे में सैन्य योजनाकारों को सैनिकों की तैनाती, ऑपरेशनल रणनीति और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क रहना होगा.
उन्होंने युवा कैडेटों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले समय में उन्हें ऐसे सुरक्षा वातावरण में काम करना होगा, जहां तकनीक, रणनीति और त्वरित निर्णय क्षमता सफलता की कुंजी होंगे. सेना प्रमुख का यह बयान भारत की सुरक्षा तैयारियों और बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में सशस्त्र बलों की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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