बेंगलुरु। कर्नाटक विधान परिषद के सभापति बसवराज होरट्टी ने 14 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उनके इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि उनके इस्तीफे के बाद विधान परिषद के नए सभापति के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसे लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है।
बसवराज होरट्टी ने कहा कि उन्होंने अपने निर्णय की जानकारी संबंधित पक्षों को दे दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका फैसला पूरी तरह व्यक्तिगत और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सभापति का पद किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि पूरे सदन का होता है और इससे जुड़े सभी निर्णय संविधान और नियमों के अनुसार ही होने चाहिए।
हाल के दिनों में सभापति पद को लेकर राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चाएं चल रही थीं। सत्तारूढ़ कांग्रेस की ओर से नए सभापति के लिए दावेदारी की खबरों के बीच होरट्टी का यह फैसला सामने आया है। हालांकि उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अंतिम निर्णय सदन की प्रक्रिया के तहत ही लिया जाना चाहिए। होरट्टी ने यह भी कहा कि उन्होंने लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में काम किया है और हमेशा संसदीय परंपराओं तथा लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान किया है।
उनका मानना है कि विधान परिषद जैसे संवैधानिक संस्थानों की गरिमा बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 14 अगस्त को उनके इस्तीफे के बाद विधान परिषद में नए सभापति के चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो सकती हैं। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की नजरें अब आगामी घटनाक्रम पर टिकी हैं। बसवराज होरट्टी कर्नाटक की राजनीति के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और लंबे समय से विधान परिषद की कार्यवाही का संचालन कर रहे हैं।
उनके इस्तीफे के फैसले ने राज्य की राजनीतिक हलचलों को नई दिशा दे दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि उनके उत्तराधिकारी के रूप में किसे जिम्मेदारी सौंपी जाती है और सदन में आगे की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है।



