नई दिल्ली। भारतीय कंपाउंड तीरंदाज ज्योति सुरेखा वेन्नम 2026 एशियन गेम्स में चौथी बार भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार हैं। पिछले तीन एशियन गेम्स में पदक जीत चुकीं ज्योति इस बार एक नई और युवा भारतीय महिला टीम के साथ मैदान में उतरेंगी। उनका पूरा फोकस जापान में होने वाले इस बड़े टूर्नामेंट में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर है।
ज्योति के लिए इस बार चुनौती सिर्फ अपने प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। महिला कंपाउंड टीम में नए खिलाड़ियों के साथ तालमेल बनाना भी अहम होगा। टीम ने एशियन गेम्स से पहले वर्ल्ड कप के तीसरे और चौथे चरण में एक साथ मुकाबले खेले हैं। इन टूर्नामेंटों ने खिलाड़ियों को एक-दूसरे की शैली समझने और टीम के रूप में बेहतर तालमेल बनाने का मौका दिया है।
ज्योति का कहना है कि टीम लगातार बेहतर होने की कोशिश कर रही है और खिलाड़ियों के बीच आपसी समझ भी मजबूत हो रही है। हालांकि वह टीम की सबसे अनुभवी सदस्यों में शामिल हैं, लेकिन उनके मुताबिक पूरी टीम के खिलाड़ियों के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का अच्छा अनुभव है। ऐसे में जिम्मेदारी केवल किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं होगी।
पिछली कामयाबी का दबाव नहीं
ज्योति ने पिछले तीन एशियन गेम्स में लगातार पदक जीते हैं। हांगझोउ एशियन गेम्स में उन्होंने कंपाउंड महिला व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया था। इस बार भी उनसे बड़ी उम्मीदें हैं, लेकिन ज्योति पिछली उपलब्धियों को लेकर दबाव में नहीं आना चाहतीं। उनका कहना है कि वह पुराने नतीजों के बजाय मौजूदा प्रतियोगिता में अपना सर्वश्रेष्ठ देने पर ध्यान दे रही हैं।
भारतीय तीरंदाजी टीम में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कई अनुभवी और पिछले एशियन गेम्स में पदक जीत चुके तीरंदाज टीम में जगह नहीं बना सके। ऐसे में ज्योति भारतीय कंपाउंड महिला टीम की सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में से एक बन गई हैं।
एशियन गेम्स पर पूरा फोकस
ज्योति के लिए 2026 का सबसे बड़ा लक्ष्य एशियन गेम्स है। उनका मानना है कि हर टूर्नामेंट के महत्व के हिसाब से लक्ष्य तय करना जरूरी है। वर्ल्ड कप हर साल होते हैं, लेकिन इस साल एशियन गेम्स सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
उन्होंने तैयारी के दौरान उपकरणों से लेकर अपनी फिटनेस और मानसिक मजबूती तक हर पहलू पर ध्यान देने की बात कही। तीरंदाजी में एक सफल शॉट के लिए सिर्फ शारीरिक क्षमता नहीं, बल्कि तकनीक, नियंत्रण और मानसिक एकाग्रता भी बेहद जरूरी होती है।
अब ज्योति की नजर अपने चौथे एशियन गेम्स पर है। तीन लगातार पदक जीतने के अनुभव के साथ वह नई टीम के साथ एक और बड़ी कामयाबी हासिल करने के इरादे से जापान पहुंचेंगी।



