जोधपुर। जोधपुर में नगर निकाय चुनाव से पहले भाजपा के भीतर टिकट को लेकर नाराजगी और बगावत के बीच एक भावुक तस्वीर सामने आई है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत बुधवार को जोधपुर पहुंचे तो एयरपोर्ट पर उनसे मिलने आए भाजपा के वार्ड नंबर 10 के प्रबल दावेदार धनाराम चौधरी भावुक हो गए। पार्टी से टिकट नहीं मिलने के चलते उनकी आंखों में आंसू आ गए। धनाराम को रोता देखकर गजेंद्र सिंह शेखावत ने उन्हें गले लगा लिया और ढांढस बंधाया। शेखावत ने कहा कि सभी मिलकर पार्टी को मजबूत करेंगे और पार्टी के लिए एकजुट होकर काम करेंगे।
टिकट नहीं मिलने पर भावुक हुए दावेदार
धनाराम चौधरी वार्ड नंबर 10 से भाजपा के टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया। शेखावत से मुलाकात के दौरान वह अपने भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और रोने लगे। केंद्रीय मंत्री ने उन्हें अपने पास बुलाकर गले लगाया।
‘राजनीति में महत्वाकांक्षा होना जरूरी’
नगर निगम चुनाव में भाजपा के कई कार्यकर्ताओं के निर्दलीय या बागी उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने के सवाल पर शेखावत ने कहा कि राजनीतिक क्षेत्र में काम करने वाले कार्यकर्ताओं में महत्वाकांक्षा होना जरूरी है। पार्टी किसी एक व्यक्ति को टिकट देने से पहले कई तरह के राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखती है। उन्होंने कहा कि संगठन के पदाधिकारी, विधायक और कार्यकर्ता लगातार ऐसे लोगों से बातचीत कर रहे हैं। परिवार भाव से काम करने वाली पार्टी में इस तरह की असहज स्थिति ज्यादा समय तक नहीं रहेगी।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना
गजेंद्र सिंह शेखावत ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व में कांग्रेस ने जोधपुर नगर निगम को दो हिस्सों में बांटा था। उन्होंने दावा किया कि अब एकीकृत जोधपुर नगर निगम में भाजपा की सरकार वापस आएगी और शहर का व्यापक विकास किया जाएगा। शेखावत ने कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और नगर निकाय के साथ आगे पंचायत स्तर तक भाजपा की जीत होने पर विकास की गति और तेज होगी।
भाजपा में डैमेज कंट्रोल शुरू
नगर निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद भाजपा के सामने कई वार्डों में बागियों को मनाने की चुनौती है। पार्टी ने मंगलवार शाम से ही डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू कर दी है। संगठन के स्तर पर नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत की जा रही है। नामांकन वापसी की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही पार्टी की कोशिश है कि निर्दलीय और बागी उम्मीदवारों को मनाकर उनके नामांकन वापस कराए जाएं। गजेंद्र सिंह शेखावत भी इस कवायद में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।



