जयपुर। राजस्थान के आगामी निकाय चुनाव को लेकर जयपुर में सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले सांगानेर क्षेत्र में वार्ड 48 से हरिओम स्वर्णकार ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल कर चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। हरिओम स्वर्णकार की निर्दलीय एंट्री से वार्ड 48 में राजनीतिक समीकरण बदलने की चर्चा शुरू हो गई है। खास बात यह है कि पिछले निकाय चुनाव में हरिओम स्वर्णकार ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर मानसरोवर क्षेत्र में पार्टी का परचम फहराया था। अब उन्होंने पार्टी से अलग होकर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है।
वार्ड 48 में मुकाबला हुआ दिलचस्प
हरिओम स्वर्णकार के निर्दलीय चुनाव लड़ने से वार्ड 48 का मुकाबला पहले के मुकाबले ज्यादा रोचक हो गया है। पिछले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज करने वाले स्वर्णकार के पास क्षेत्र में व्यक्तिगत जनसंपर्क और पुराने चुनावी अनुभव का फायदा होने की उम्मीद जताई जा रही है। उनके नामांकन के बाद अब वार्ड 48 में मुकाबले को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी माना जा रहा है कि मजबूत संगठन वाली पार्टियों के उम्मीदवारों के बीच निर्दलीय प्रत्याशी की मौजूदगी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।
मानसरोवर में कांग्रेस की जीत के बाद अब निर्दलीय दांव
हरिओम स्वर्णकार पिछले चुनाव में मानसरोवर क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर जीतने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। अब उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़कर एक बार फिर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित करने का दांव खेला है। उनकी यह रणनीति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि सांगानेर को भाजपा के मजबूत राजनीतिक क्षेत्रों में गिना जाता है। ऐसे में भाजपा के गढ़ में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोकना चुनावी मुकाबले में नई चुनौती पैदा कर सकता है।
निर्दलीय प्रत्याशी की एंट्री से बढ़ी हलचल
वार्ड 48 में हरिओम स्वर्णकार के नामांकन के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल बढ़ गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पिछले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल करने वाले स्वर्णकार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर कितना समर्थन जुटा पाते हैं। निकाय चुनाव में वार्ड स्तर पर उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहचान, जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दे अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में हरिओम स्वर्णकार की एंट्री ने वार्ड 48 के चुनाव को खासा रोचक बना दिया है।



