जयपुर। जयपुर नगर निगम चुनाव 2026 को लेकर बीजेपी ने टिकट वितरण में ‘नारी शक्ति’ पर बड़ा दांव खेला है। पार्टी की ओर से जारी 145 प्रत्याशियों की सूची में 52 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है। 33% आरक्षण के दायरे से आगे बढ़कर महिलाओं को टिकट दिया है। इस तरह बीजेपी ने महिला नेतृत्व को अपनी चुनावी रणनीति में खास जगह दी है। पार्टी के इस कदम को महिला वोटरों को साधने के साथ-साथ स्थानीय निकाय की राजनीति में महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि कई सामान्य और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण वार्डों में भी बीजेपी ने महिला चेहरों पर भरोसा जताया है।
145 प्रत्याशियों में 52 महिला चेहरे
जयपुर नगर निगम में कुल 150 वार्ड हैं। बीजेपी ने फिलहाल 145 वार्डों के लिए प्रत्याशियों की सूची जारी की है। इनमें 52 महिलाओं को टिकट दिया गया है। पार्टी ने महिला आरक्षण के दायरे से आगे बढ़ते हुए कई वार्डों में महिला नेताओं को चुनाव मैदान में उतारा है। इससे बीजेपी की ओर से महिला नेतृत्व और महिला सम्मान के राजनीतिक संदेश को भी मजबूती देने की कोशिश नजर आती है।
इन वार्डों में बीजेपी ने उतारीं महिला प्रत्याशी
बीजेपी की जारी सूची के अनुसार महिला प्रत्याशियों का वार्डवार विवरण इस प्रकार है—
- वार्ड 4 — पिंकी देवी शर्मा
- वार्ड 6 — स्नेहलता साबू
- वार्ड 7 — पूजा
- वार्ड 8 — सुमन अग्रवाल
- वार्ड 9 — मंजू अग्रवाल
- वार्ड 10 — पलक यादव
- वार्ड 20 — डॉ. उदिता सिंह चौहान
- वार्ड 25 — चंचल कंवर
- वार्ड 26 — श्रवणी देवी
- वार्ड 32 — श्वेता सुरोलिया
- वार्ड 33 — सीमा यादव
- वार्ड 46 — शिवकांता पांडे
- वार्ड 47 — दीपा नाथावत
- वार्ड 56 — रेखा सैनी
- वार्ड 58 — सरोज वर्मा
- वार्ड 59 — बबली वर्मा
- वार्ड 69 — पूनम चोयल
- वार्ड 70 — सुशीला देवी
- वार्ड 71 — निशा गौड़
- वार्ड 72 — गट्टू
- वार्ड 73 — जयश्री गर्ग
- वार्ड 75 — पूजा सन्मुखानी
- वार्ड 80 — दलजीत कौर
- वार्ड 82 — ममता यादव
- वार्ड 86 — उषा टाटीवाल
- वार्ड 87 — प्रतिभा शर्मा
- वार्ड 88 — शशि कुमारी मिश्रा
- वार्ड 90 — सरोज कंवर
- वार्ड 92 — शीला शर्मा
- वार्ड 94 — सुनीता मेहरा
- वार्ड 100 — कविता शर्मा
- वार्ड 107 — अनुराधा माहेश्वरी
- वार्ड 108 — मीनाक्षी पारीक
- वार्ड 110 — ज्योति खंडेलवाल
- वार्ड 116 — लक्ष्मी देवी कोली
- वार्ड 117 — शबाब जहां
- वार्ड 123 — पूनम मेहता
- वार्ड 124 — मनभरी देवी
- वार्ड 125 — लक्ष्मी देवी उज्जैनिया
- वार्ड 126 — रीमा उमरवाल
- वार्ड 133 — सीमा पारीक
- वार्ड 136 — मिजाना मिर्जा
- वार्ड 138 — ममता
- वार्ड 139 — रेनू खंडेलवाल
- वार्ड 142 — मंजू महावर
- वार्ड 143 — निधि सैनी
- वार्ड 145 — वंदना जोशी
- वार्ड 146 — अफसाना
- वार्ड 148 — मीनू सैनी
- वार्ड 149 — सीनू पारीक
- वार्ड 150 — शालू मीणा
महिला वोट बैंक पर बीजेपी की नजर
जयपुर नगर निगम चुनाव में महिला मतदाता एक महत्वपूर्ण फैक्टर हो सकती हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में महिला उम्मीदवारों को टिकट देकर बीजेपी ने महिला वोटरों के बीच सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की है। महिला प्रत्याशियों को मैदान में उतारने से पार्टी को स्थानीय स्तर पर महिला कार्यकर्ताओं और संगठनों को सक्रिय करने का भी मौका मिलेगा। चुनाव प्रचार के दौरान महिला सुरक्षा, स्वच्छता, सड़क, पानी, स्वास्थ्य, पार्क और स्थानीय सुविधाओं जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए जा सकते हैं।
सामान्य वार्डों में भी महिला चेहरों पर भरोसा
बीजेपी की रणनीति की खास बात यह है कि महिला उम्मीदवारों को सिर्फ आरक्षित सीटों तक सीमित नहीं रखा गया है। पार्टी ने कई सामान्य और सियासी रूप से महत्वपूर्ण वार्डों में भी महिला चेहरों पर भरोसा जताया है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी महिला उम्मीदवारों को सिर्फ आरक्षण की बाध्यता के तौर पर नहीं, बल्कि चुनावी जीत के संभावित चेहरे के तौर पर भी देख रही है।
जयपुर चुनाव में बदलेगा सियासी समीकरण?
नए परिसीमन के बाद जयपुर नगर निगम में कुल 150 वार्ड बनाए गए हैं। ऐसे में पुराने चुनावी आंकड़ों के आधार पर नए वार्डों का अनुमान लगाना आसान नहीं होगा। बीजेपी के महिला चेहरों पर बड़े दांव से अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इनमें से कितने उम्मीदवार अपने-अपने वार्ड में पार्टी के पक्ष में जीत हासिल कर पाते हैं। महिला नेतृत्व, स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ और पार्टी संगठन की ताकत चुनाव परिणाम में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
बीजेपी की रणनीति का चुनावी असर कितना?
145 प्रत्याशियों की सूची में 52 महिलाओं को टिकट देकर बीजेपी ने जयपुर नगर निगम चुनाव में महिला नेतृत्व को प्रमुखता दी है। अब पार्टी के सामने इन उम्मीदवारों को मजबूत संगठनात्मक समर्थन देने और स्थानीय स्तर पर चुनावी समीकरण साधने की चुनौती होगी। फिलहाल बीजेपी की इस सूची ने जयपुर के नगर निगम चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है। अब मुकाबला सिर्फ पार्टी बनाम पार्टी नहीं, बल्कि नए वार्डों में नए चेहरों की व्यक्तिगत पकड़ और स्थानीय मुद्दों की परीक्षा भी होगा।



