Jaipur AI Traffic System: स्मार्ट सिटी जयपुर में ट्रैफिक मैनजमेंट जल्द ही पुरानी फिक्स टाइमर प्रणाली के बजाय पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AIएआई) आधारित तकनीक से संचालित होगा. यानि अब सड़क ट्रैफिक के आधार पर यह तय होगा कि कितने समय तक ग्रीन सिग्नल रहेगा और कितने समय तक रेड.
अधिकारियों के मुताबिक, रामबाग सर्किल पर 39 दिनों तक किए गए परीक्षण के शत-प्रतिशत सफल रहने के बाद इस प्रणाली का विस्तार किया जा रहा है. शहर के 423 चौराहों में से 253 प्रमुख चौराहों को AI आधारित स्मार्ट कैमरों और इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) से जोड़ा जाएगा.
कैसे काम करेगा AI बेस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम ?
जयपुर यातायात पुलिस ने डेटा कोर इन्फोटेक के सहयोग से इस परियोजना का परीक्षण किया. कंपनी के निदेशक बसंत गोस्वामी और ओजस शुक्ला ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में ट्रैफिक सिग्नलों पर लाल और हरी बत्ती का समय पहले से निर्धारित रहता है, चाहे किसी सड़क पर यातायात का दबाव कम हो और दूसरी ओर लंबा जाम लगा हो.
उन्होंने बताया कि नयी AI आधारित ITMS प्रणाली इससे बिल्कुल अलग है. चौराहों पर लगाए गए AI कैमरे चौबीसों घंटे वाहनों की संख्या और उनकी कतार की लंबाई का वास्तविक समय (रियल टाइम) में आकलन करते हैं. जिस दिशा में यातायात का दबाव अधिक होता है, वहां प्रणाली स्वतः हरी बत्ती (ग्रीन टाइम) की अवधि बढ़ा देती है, जबकि कम यातायात वाली दिशा में इसे घटा देती है.
पूरी तरह ऑटोमेटिक
इस प्रणाली के संचालन के लिए किसी यातायात पुलिसकर्मी द्वारा रिमोट या बटन संचालित करने की आवश्यकता नहीं होती. यह पूरी तरह स्वचालित रूप से 24 घंटे कार्य करती है. उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा की पहल पर राजस्थान पुलिस यातायात प्रबंधन के क्षेत्र में इस अत्याधुनिक तकनीक को लागू कर रही है. इसकी प्रायोगिक परियोजना 3 जून से 11 जुलाई तक जयपुर के रामबाग सर्किल पर संचालित की गई.
इस अवधि में प्रणाली ने बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के 4,88,140 से अधिक वाहनों का सुचारु आवागमन सुनिश्चित किया. AI आधारित नियंत्रण के कारण प्रत्येक लेन में वाहन चालकों को औसतन 8 से 45 सेकंड तक की समय बचत हुई, जबकि औसत ‘ग्रीन टाइम’ 33.63 सेकंड दर्ज किया गया.
नियमों का उल्लंघन करने वालों पर रहेगी नजर
AI प्रणाली केवल यातायात प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि चौराहों पर यातायात नियमों के पालन को भी सुनिश्चित करेगी. परीक्षण के दौरान पाया गया कि एक कैमरा प्रतिदिन लगभग 4,200 वाहनों की निगरानी करता है, जिनमें औसतन 450 यातायात नियमों के उल्लंघन के मामलों का स्वतः रिकॉर्ड तैयार हो जाता है. उन्होंने बताया कि प्रणाली लागू होने के बाद निर्धारित सीमा से अधिक गति से वाहन चलाना, रेड लाइट का उल्लंघन करना और गलत दिशा में वाहन चलाने जैसे मामलों का स्वतः पता लगाया जा सकेगा और ऐसे उल्लंघनों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित होगी.
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