Friday, August 21, 2026
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आरजीएचएस में निजी अस्पतालों की अनियमितता उजागर, 238 मरीजों से जुड़े 479 मामले जांच के घेरे में

राजस्थान की आरजीएचएस योजना में निजी अस्पतालों की कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जांच में एक ही बीमारी के उपचार के दौरान मरीजों को तीन-चार बार बुलाकर अलग-अलग जांच कराने के 479 मामले मिले हैं। करीब 50 निजी अस्पताल और 60 चिकित्सक जांच के दायरे में हैं। आशंका है कि प्री-ऑथराइजेशन से बचने और अधिक क्लेम लेने के लिए जांचें विभाजित की गईं। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।

जयपुर। राजस्थान सरकार की स्वास्थ्य योजना आरजीएचएस में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। प्रारंभिक जांच में ऐसे मामले मिले हैं, जिनमें अधिक क्लेम हासिल करने और 2 हजार रुपये से अधिक की जांच पर लागू प्री-ऑथराइजेशन प्रक्रिया से बचने के लिए मरीजों को एक ही बीमारी के उपचार के दौरान तीन से चार बार अस्पताल बुलाया गया और अलग-अलग जांचें कराई गईं।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, आरजीएचएस के लगातार किए जा रहे डेटा विश्लेषण के दौरान एक महीने में 238 लाभार्थियों से संबंधित 479 मामले सामने आए हैं। इन मामलों में प्रदेश के करीब 50 निजी अस्पताल और 60 चिकित्सक जांच के दायरे में आए हैं। सबसे अधिक मामले जोधपुर, जयपुर, उदयपुर और अलवर में सामने आए हैं।

प्रारंभिक पड़ताल में आशंका जताई गई है कि कुछ अस्पतालों ने जांचों और उनसे जुड़े दावों को अलग-अलग करके पेश किया, ताकि निर्धारित सीमा से अधिक लागत वाली जांचों के लिए जरूरी प्री-ऑथराइजेशन व्यवस्था से बचा जा सके। यदि ऐसा जानबूझकर अधिक भुगतान प्राप्त करने के उद्देश्य से किया गया है तो इसे योजना के नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।

मरीजों को बार-बार अस्पताल बुलाने का आरोप

आरजीएचएस की परियोजना अधिकारी डॉ. निधि पटेल के अनुसार, जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि अलग-अलग जांचों के लिए मरीजों को अनावश्यक रूप से कई बार अस्पताल आना पड़ा। इनमें महिलाओं और बुजुर्ग लाभार्थियों के मामले भी शामिल हैं।

एक ही बीमारी के उपचार के लिए बार-बार अस्पताल जाने से मरीजों को शारीरिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। साथ ही, इस तरह जांचों को अलग-अलग कराने से योजना की निगरानी व्यवस्था को दरकिनार किए जाने की आशंका भी सामने आई है।

दोषी मिले तो होगी सख्त कार्रवाई

आरजीएचएस प्रशासन ने इन सभी मामलों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान यदि यह प्रमाणित होता है कि किसी अस्पताल या चिकित्सक ने अधिक क्लेम हासिल करने अथवा प्री-ऑथराइजेशन प्रक्रिया से बचने के लिए जानबूझकर जांचों या दावों को विभाजित किया, तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का कहना है कि आरजीएचएस का उद्देश्य पात्र मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के साथ उन्हें अनावश्यक जांच और अस्पताल के चक्कर से बचाना है। योजना में पारदर्शिता बनाए रखना और सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग को रोकना भी इसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित अस्पतालों और चिकित्सकों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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