मुंबई। मुंबई पुलिस ने वर्ष 2008 के 26/11 आतंकी हमले के मामले में पाकिस्तान में मौजूद छह फरार आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से इन आरोपियों तक अदालत की ओर से जारी उद्घोषणा आदेश इंटरपोल के माध्यम से पहुंचाने में मदद मांगी है। इस प्रक्रिया के आगे बढ़ने के बाद आरोपियों के खिलाफ उनकी गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाने का रास्ता खुल सकता है।
इन छह आरोपियों में लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी, साजिद मीर, अबू अलकामा, आसिम उर्फ अबू काहफा और मेजर अब्दुर रहमान पाशा शामिल हैं। सभी आरोपी पाकिस्तानी नागरिक हैं और फिलहाल भारतीय जांच एजेंसियों की पहुंच से बाहर हैं।
मुंबई पुलिस ने विशेष अदालत के समक्ष शुक्रवार को इस मामले में अंतरिम रिपोर्ट पेश की। पुलिस की ओर से विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने अदालत को बताया कि गृह मंत्रालय से इन आरोपियों तक उद्घोषणा आदेश पहुंचाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया गया है। गृह मंत्रालय ने 3 अगस्त को पुलिस के अनुरोध की पुष्टि करते हुए आगे की स्थिति बताने के लिए समय मांगा था।
गैरमौजूदगी में चल सकता है मुकदमा
यह कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 356 के तहत की जा रही है। इस प्रावधान के तहत ऐसे घोषित अपराधियों के खिलाफ उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया जा सकता है, जो गिरफ्तारी से बचने के लिए देश से बाहर हैं और जिनकी तत्काल गिरफ्तारी की संभावना नहीं है।
हालांकि, गैरमौजूदगी में सुनवाई शुरू करने से पहले अदालत को कानूनी प्रक्रिया और निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। आरोपियों को अदालत के सामने पेश होने का अवसर भी दिया जाएगा। निर्धारित अवधि में उनके सामने नहीं आने की स्थिति में उनके खिलाफ अनुपस्थिति में मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ सकती है।
26/11 में गई थी 166 लोगों की जान
मुंबई में 26 नवंबर 2008 को शुरू हुए आतंकी हमलों ने देश को झकझोर दिया था। दस पाकिस्तानी आतंकियों ने करीब 60 घंटे तक मुंबई के कई महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाया था। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, ताज महल पैलेस होटल, ट्राइडेंट होटल और नरीमन हाउस समेत कई जगहों पर हमला हुआ था।
इस हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें छह अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे। हमलावरों में से अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया था। बाद में अदालत ने उसे हत्या और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने सहित गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया और 2012 में उसे फांसी दी गई।
अब करीब 18 साल बाद पाकिस्तान में मौजूद आरोपियों के खिलाफ भारत में कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश तेज हुई है। विशेष अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर को करेगी, जिसमें उद्घोषणा आदेश की तामील से जुड़ी स्थिति रिपोर्ट पेश किए जाने की उम्मीद है।



