नई दिल्ली। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन सितंबर में भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे। ईरानी सूत्रों के अनुसार, पेजेशकियन की यह यात्रा भारत और ईरान के बीच उच्चस्तरीय संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी के तहत शिखर सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली में किया जाएगा।
भारत ने जनवरी 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी। इस वर्ष होने वाला सम्मेलन संगठन का 18वां शिखर सम्मेलन होगा। भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स के माध्यम से आर्थिक सहयोग, नवाचार, टिकाऊ विकास और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।
ईरानी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण परिस्थितियां बनी हुई हैं। ऐसे में सम्मेलन के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। पेजेशकियन की मौजूदगी से ब्रिक्स मंच पर ईरान की भूमिका और क्षेत्रीय मुद्दों पर उसके दृष्टिकोण को भी महत्व मिलने की संभावना है।
मोदी से पहले भी हो चुकी है मुलाकात
मसूद पेजेशकियन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इससे पहले भी मुलाकात हो चुकी है। दोनों नेता अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आमने-सामने आए थे। उस दौरान दोनों नेताओं के बीच भारत-ईरान संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई थी।
ईरान वर्ष 2024 में ब्रिक्स का पूर्ण सदस्य बना था। ईरान के साथ मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात भी उस विस्तार के दौरान संगठन में शामिल हुए थे। इसके बाद इंडोनेशिया के शामिल होने से ब्रिक्स के पूर्ण सदस्यों की संख्या बढ़कर 11 हो गई।
भारत के लिए चाबहार बंदरगाह अहम
भारत और ईरान के संबंधों में चाबहार बंदरगाह की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत इस बंदरगाह के माध्यम से मध्य एशियाई देशों तक व्यापारिक और रणनीतिक संपर्क मजबूत करने की दिशा में काम करता रहा है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच व्यापार, परिवहन संपर्क और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।
पेजेशकियन की प्रस्तावित यात्रा से पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची जून में भारत आ चुके हैं। उन्होंने ब्रिक्स से संबंधित विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लिया था। अब ईरानी राष्ट्रपति की नई दिल्ली यात्रा को दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कई सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की संभावना है। ऐसे में ईरानी राष्ट्रपति की मौजूदगी से सम्मेलन में पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा को नई दिशा मिल सकती है।



