ईरान ने करीब आठ महीने बाद भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से भारत के लिए कच्चे तेल और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर आवाजाही आसान होने की उम्मीद है। ईरान ने भारत के अलावा चीन, इराक और कतर के जहाजों को भी इस मार्ग से गुजरने की छूट दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर पाबंदियां लागू थीं। ईरान की न्यूज वेबसाइट ईरानवायर और अनादोलू एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अहमद हयात-मोगद्दम ने मंगलवार को इस फैसले की जानकारी दी।
दवाओं की आपूर्ति के बदले भारत को राहत
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने भारत को यह छूट इसलिए दी है, ताकि उसे भारत से दवाओं की आपूर्ति मिलती रहे। वहीं, चीन को राहत देने के पीछे ईरान की उम्मीद बताई गई है कि मुश्किल समय में बीजिंग उसका राजनीतिक समर्थन करेगा। हालांकि, इस छूट के साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय और चीनी जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए शुल्क देना होगा, जबकि कतर के जहाजों को बिना किसी शुल्क के आवाजाही की अनुमति दी गई है। इराक को यह छूट किस आधार पर मिली है, इस बारे में स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से करीब 40 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से होकर आता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों से भारत आने वाली आपूर्ति के लिए यह मार्ग अहम भूमिका निभाता है। यदि भारत प्रतिदिन करीब 50 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है, तो इसमें लगभग 20 लाख बैरल तेल होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते पहुंचता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह की पाबंदी भारत की तेल आपूर्ति और ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर डाल सकती है।
LNG और LPG की सप्लाई के लिए भी अहम
होर्मुज स्ट्रेट केवल कच्चे तेल की आपूर्ति तक सीमित नहीं है। भारत खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में LNG यानी प्राकृतिक गैस और LPG यानी रसोई गैस का भी आयात करता है। इन ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति के लिए भी यह समुद्री मार्ग महत्वपूर्ण है। ऐसे में भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति मिलने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति को राहत मिलने की उम्मीद है।



