नई दिल्ली। भारत की स्टार वेटलिफ्टर साइखोम मीराबाई चानू ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए राष्ट्रमंडल खेल 2026 में इतिहास रच दिया। ग्लासगो में आयोजित प्रतियोगिता में महिलाओं की 48 किलोग्राम भार वर्ग स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड अपने नाम किया। इसी के साथ भारत को इन खेलों का पहला स्वर्ण पदक भी दिलाया।
इस ऐतिहासिक जीत के पीछे मीराबाई का कठिन संघर्ष और अनुशासन भी उतना ही बड़ा रहा। निर्धारित वजन वर्ग में बने रहने के लिए उन्होंने लगातार दो दिनों तक कुछ नहीं खाया। प्रतियोगिता से एक रात पहले उन्होंने तिरंगे के रंगों वाले रिबन से खुद अपने लिए तितली के आकार की हेयर क्लिप बनाई, जो उनके देशप्रेम की झलक भी थी।

मुकाबले की शुरुआत आसान नहीं रही। पहले प्रयास में वह सफल नहीं हो सकीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। शानदार वापसी करते हुए उन्होंने एक के बाद एक बेहतरीन प्रयास किए और रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया।
फाइनल में मीराबाई ने स्नैच में 85 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 105 किलोग्राम वजन उठाया। इस तरह उन्होंने कुल 190 किलोग्राम भार उठाकर प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया और अपनी गोल्डन हैट्रिक पूरी की।
जैसे ही पदक समारोह में भारतीय तिरंगा सबसे ऊंचा लहराया और राष्ट्रगान बजा, मीराबाई चानू भावुक हो गईं। उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। यह जीत केवल एक स्वर्ण पदक नहीं, बल्कि उनके त्याग, मेहनत, देशभक्ति और अटूट संकल्प की कहानी है, जिसने उन्हें भारतीय भारोत्तोलन के महानतम खिलाड़ियों में एक बार फिर स्थापित कर दिया।



