जयपुर। राजस्थान कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल एक बार फिर संपत्तियों की खरीद को लेकर चर्चा में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिखर अग्रवाल, उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर, दोनों बेटों और सास-ससुर ने करीब ढाई साल के भीतर एक ही कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड से 40 विला और कॉटेज खरीदे। इन संपत्तियों को खरीदने के बाद उसी कंपनी को सालाना लीज पर देने का मामला अब सवालों के घेरे में है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार ने इन संपत्तियों की खरीद पर कुल 6 करोड़ 16.5 लाख रुपये खर्च किए। इनमें उदयपुर के बुझाड़ा स्थित अनंता रिसॉर्ट में सितंबर 2023 में खरीदे गए 20 कॉटेज और अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में 27 मार्च 2026 में खरीदे गए 20 विला शामिल हैं।
इस मामले में संपत्तियों के सरकारी रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठे हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर के नाम दोनों रिसॉर्ट में कुल 28 संपत्तियां हैं, जबकि अचल संपत्ति विवरण (आईपीआर) में इनके उल्लेख को लेकर अंतर सामने आया है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि शिखर अग्रवाल ने अपने नाम की 14 संपत्तियों का विवरण दिया, जबकि प्रशाखा माथुर के 8 जनवरी 2026 के आईपीआर में संपत्ति का विवरण शून्य दर्ज था।
इस पर शिखर अग्रवाल ने संपत्तियों की खरीद की पुष्टि करते हुए कहा कि पूरी जानकारी आईपीआर और रिटर्न में दी गई है। उनके अनुसार, दस्तावेज गलत स्थान पर संलग्न होने के कारण विवरण दूसरी जगह दिखाई दे रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों बेटों ने स्वतंत्र रूप से संपत्तियां खरीदी हैं। अब संपत्तियों की वास्तविक बाजार कीमत, भुगतान के तरीके, लीज व्यवस्था और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज विवरण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, आय से अधिक संपत्ति या किसी अन्य अनियमितता की पुष्टि जांच अथवा आधिकारिक निष्कर्ष के बिना नहीं की जा सकती।
उधर अब एक और खेल निकलकर सामने आया है। अनंता रिसॉर्ट में 27 मार्च 2026 में एक तरफ विला खरीदे गए, इन 20 विला की जिस दिन रजिस्ट्री हुई ठीक उसी दिन गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के फायदे के लिए एक आदेश भी जारी किया गया। जिसको लेकर सोशल मीडिया पर शिखर अग्रवाल को ट्रोल भी किया जा रहा है।

क्या इस हाथ दे, उस हाथ ले वाला खेल खेला गया
जानकारी के मुताबिक गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड परियोजना के होटल एवं रिसॉर्ट जो कि अलवर के अजबगढ़ में स्थित है, को राज्य कर पर निवेश सब्सिडी में 75% की 10 वर्षों तक छूट दी गई। वहीं बिजली शुल्क में छूट 100% 10 वर्षों तक कर दी गई। इसी अनुसार अन्य लाभ RIPS 2019 के अनुसार दिए गए वो अलग। यह आदेश 27 मार्च 2026 को उसी दिन जारी हुआ जिस दिन आईएएस शिखर अग्रवाल ने विला की रजिस्ट्री कराई। ऐसे में सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि कहीं यह इस हाथ दे, उस हाथ ले, वाला खेल तो नहीं खेला गया। आखिर गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड परियोजना पर इतनी मेहरबानी क्यों की गई यह सोचने वाली बात है। सोशल मीडिया पर ट्रोल करने का कारण बताया जा रहा है कि जिस दिन कॉटेज और विला की रजिस्ट्री हुई उस वक्त शिखर अग्रवाल मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव पद पर पर कार्यरत थे और उसी वक्त माना जा रहा है कि पद के प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड को फायदा पहुंचाने के लिए यह विशेष आदेश उसी दिन जारी हुए। हालांकि जागो इंडिया जागो इसकी पुष्टि नहीं करता।
हर साल 1.80 करोड़ रुपये की लीज आय
बताया जा रहा है कि बुझाड़ा में खरीदे गए 20 कॉटेज को 4 लाख रुपये प्रति कॉटेज सालाना की दर से लीज पर दिया गया। वहीं, अजबगढ़ के 20 विला के लिए 5 लाख रुपये प्रति विला सालाना लीज तय हुई। इस तरह परिवार को इन संपत्तियों से हर साल कुल 1.80 करोड़ रुपये की लीज आय मिलने का प्रावधान है। बुझाड़ा में शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर ने 15 लाख रुपये प्रति कॉटेज की दर से 10-10 कॉटेज खरीदे। अजबगढ़ में दोनों के नाम आठ-आठ विला दर्ज हैं, जिनकी रजिस्ट्री 16.5 लाख रुपये प्रति विला की दर से हुई।
परिवार के दोनों बेटों ने भी अजबगढ़ में विला खरीदे। रिपोर्ट के अनुसार, शिवप्रिया ने तीन विला 14 लाख रुपये प्रति विला की दर से खरीदे। दूसरे बेटे प्रशिख ने एक विला 16.5 लाख रुपये और चार विला 15 लाख रुपये प्रति विला की दर से खरीदे। प्रशाखा माथुर के माता-पिता मंजुला और रघुवंश नारायण माथुर ने भी संयुक्त रूप से चार विला खरीदे।



